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लाइफ स्टाइल

इस हरी चीज के इस्तेमाल से 60 साल की उम्र में भी रहेंगे जवान!

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नई दिल्ली। आजकल की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी में  लोगो के पास आराम से बैठ कर खाना खाने का भी का समय नहीं है तो स्किन और ब्यूटी ट्रीटमेंट्स के लिए वक्त निकालना तो दूर की बात है। आज हम आपको कुछ ऐसे कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जिससे आप 60 साल की उम्र में भी जवान बने रह सकते हैं।

पपीता का नियमित सेवन आपके चेहरे और बालों की खूबसूरती में इज़ाफ़ा  कर सकता है। अगर आप चाहते हैं हमेशा सुन्दर दिखना  तो दिन में कम से कम एक बार पपीता जरूर खाएं, इसमें पाए जाने वाले विटामिन A, C और E, के साथ और कई सारे एंटीऑक्सीडेंट्स न सिर्फ आपकी त्वचा को खूबसूरत रखने में आपकी मदद करते हैं, बल्कि उम्र के साथ त्वचा में होने वाले परिवर्तनों को भी होने से रोकते हैं।

वैसे झुर्रियों की परेशानी बढ़ती उम्र के लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन आजकल युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। इसके पीछे कई कारण  हो सकते हैं, जैसे स्ट्रेस, ज्यादा मेकअप करना और व्यस्त जीवनशैली।

जिस तरह से पपीता सेहत के लिए फायदेमंद है, उसी तरह  हमारी स्किन के लिए भी अच्छा हैं। इसे इस्तेमाल कर आप उम्र से पहले पड़ने वाली झुर्रियों से बच सकते हैं।

एक पका हुआ पपीता लेकर उससे पीसकर फेसपैक तैयार कर लें,तैयार पेस्ट को उबटन की तरह अपने चेहरे पर आधे घंटे के लिए लगा रहने दे, इसके बाद मूंगफली के तेल से हाथ से चेहरे पर मालिश करें,ध्यान रहे कि  हलके हाथों से तेल को ठोड़ी से गालों तक ले जाते हुए चीक बोन तक खींचना होता है, जिस तरह फेशियल करते हैं।

इस तरीके को आप कम से कम एक महीने तक अपनाएं,जिस से आपके चेहरे पर निखार तो आएगा ही साथ ही  झुर्रियों भी गायब हो जाएंगी

इसके साथ एक बात का खास ख्याल रखें आप इसे किसी भी मौसम में इसे कर सकते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में इससे परहेज करे

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इस वजह से होती है कब्ज की बीमारी, अपनाएं ये रामबाण उपाय

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कब्ज पाचन तन्त्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें किसी व्यक्ति का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है और मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है।

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ये है कब्ज होने के लक्षण-

  • रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है।
  • मल कुंथन करने या घण्टों बैठे रहने पर निकलता है।
    कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है। कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है।
  • कभी-कभी मल में गांठे बनने लगती है। जब रोगी मलत्याग कर लेता है तो उसे थोड़ा हल्कापन महसूस होता है।
    कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है।
    कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है। जीभ मलावृत रहती है तथा मुँह का स्वाद ख़राब हो जाता है।
  • कभी कभी मुँह से दुर्गन्ध आती है।
  • रोगी व्यक्ति के आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलता रहता है।
  • रोगी की भूख मर जाती है, पेट भारी रहता है एवं मीठा मीठा दर्द बना रहता है, शरीर तथा सिर भारी रहता है।
    सिर तथा कमर में दर्द रहता है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती, चिड़चिड़ापन तथा मानसिक तनाव सम्बन्धी लक्षण भी मिलते हैं।

ये है प्रमुख उपाय-

  • कब्ज रोग का उपचार करने के लिए कभी भी दस्त लाने वाली औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि कब्ज रोग होने के कारणों को दूर करना चाहिए और फिर प्राकृतिक चिकित्सा से इसका उपचार कराना चाहिए।
  • कब्ज रोग से बचने के लिए जब व्यक्ति को भूख लगे तभी खाना खाना चाहिए। कब्ज के रोग को ठीक करने के लिए चोकर सहित आटे की रोटी तथा हरी पत्तेदार सब्जियां चबा-चबाकर खानी चाहिए।
  • रेशे वाली (उच्च सेलूलोज) जैसे भूसी, फल, शाक इत्यादि का नियमित प्रयोग करें। प्रतिदिन कम से कम आठ दस गिलास पानी पीयें। अधिक से अधिक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए।
  • अंकुरित अन्न का अधिक सेवन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। गेहूं का रस अधिक मात्रा में पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।
  • कब्ज न बनने देने के लिए भोजन को अच्छी तरह से चबाकर खाएं तथा ऐसा भोजन करे, जिसे पचाने में आसानी हो। रोगी व्यक्ति को मैदा, बेसन, तली-भुनी तथा मिर्च मसालेन्दार चीजों आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कोष्ठबद्धता के रोगी को कम चिकनाई वाले आहार जैसे गाय का दूध, पनीर, सूखा फुल्का लेना चाहिए।
  • रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए ये फल इस प्रकार है- पपीता, संतरा, मोसम्मी, खजूर, नारियल, अमरूद, अंगूर, सेब, खीरा, गाजर, चुकन्दर, बेल, अखरोट, अंजीर आदि।
  • नींबू पानी, नारियल पानी, फल तथा सब्जियों का रस पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी को बहुत फ़ायदा मिलता है। कच्चे पालक का रस प्रतिदिन सुबह तथा शाम पीने से कब्ज रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
  • नींबू का रस गर्म पानी में मिलाकर रात के समय पीने से शौच साफ़ आती है। भोजन में दाल की अपेक्षा सब्जी, बथुआ, पालक आदि शाक का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। उबली हुई गाजर तथा पके हुए अमरुद का सेवन सवोर्त्तम होता है।

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