Connect with us

नेशनल

CBI घूसकांडः आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजना केंद्र सरकार को पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने उठाया ये कदम!

Published

on

नई दिल्ली। घूसकांड की वजह से सीबीआई के दो बड़े पदाधिकारियों के बीच छिड़ी जंग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है। पद से हटाकर छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की।

वर्मा की याचिका पर सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार और सीवीसी को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि वर्मा को अचानक छुट्टी पर क्यों भेजा गया है।

आपको बता दें कि छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे।  सीबीआई की यह जंग घूसकांड के बाद शुरु हुई और दिन ब दिन बढ़ती चली गई।

इसी के चलते 23 अक्टूबर की आधी रात को ही सीवीसी की बैठक हुई और उसके बाद उन्हीं की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने आलोक वर्मा को लंबी छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया।

सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा के वकील FS नरीमन ने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर का कार्यकाल 2 साल का होता है, ऐसे में उनको पद से नहीं हटाया जा सकता है।

नेशनल

भारतीय सेना की वीरता का परिचय चीन को मिल गया है: मोहन भागवत

Published

on

नागपुर। विजयादशमी के मौके पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि हमारी सेना की अटूट देशभक्ति व अदम्य वीरता, हमारे शासनकर्ताओं का स्वाभिमानी रवैया तथा हम सब भारत के लोगों के दुर्दम्य नीति-धैर्य का परिचय चीन को पहली बार मिला है।’ मोहन भागवत ने कहा, “पूरी दुनिया ने देखा है कि कैसे चीन भारत के क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहा है। चीन के विस्तारवादी व्यवहार से हर कोई वाकिफ है। चीन कई देशों-ताइवान, वियतनाम, यू.एस., जापान और भारत के साथ लड़ रहा है। लेकिन भारत की प्रतिक्रिया ने चीन को परेशान कर दिया है।”

नागपुर में दशहरे के कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, हमने देखा कि देश में सीएए विरोधी प्रदर्शन हुए जिससे समाज में तनाव फैला। उन्होंने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों से सांप्रदायिक कारणों से प्रताड़ित होकर विस्थापित किए जाने वाले व्यक्ति जो भारत में आते हैं, उन्हें इस सीएए के जरिए नागरिकता दी जाएगी। भारत के उन पड़ोसी देशों में साम्प्रदायिक प्रताड़ना का इतिहास है। भारत के इस नागरिकता संशोधन कानून में किसी संप्रदाय विशेष का विरोध नहीं है।

संघ प्रमुख ने कहा कि जो भारत के नागरिक हैं उनके लिए इस कानून में कोई खतरा नहीं था। बाहर से अगर कोई आता है और वह भारत का नागरिक बनना चाहता है तो इसके लिए प्रावधान है जो बरकरार हैं। वो प्रक्रिया जैसी की तैसी है। आरएसएस चीफ ने कहा कि बावजूद इसके कुछ अवसरवादी लोगों ने इस कानून का विरोध करना शुरू किया और ऐसा माहौल बनाया कि इस देश में मुसलमानों की संख्या न बढ़े इसलिए ये कानून बनाया गया है। इसके बाद इस कानून का विरोध शुरू हो गया। देश के वातावरण में तनाव आ गया।

Continue Reading

Trending