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पीएम मोदी ने त्‍योहारों की शुरुआत से पहले यूपी को दी ये बड़ी सौगातें

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्‍योहारों की शुरुआत से पहले ही यूपी के लोगों को सौगातों का गुलदस्‍ता दे दिया है। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को लखनऊ में तीन दिवसीय न्‍यू अर्बन इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ किया। देश की आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर ‘न्यू अर्बन इंडिया’ कार्यक्रम के शुभारंभ के मौके पर मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने पीएम आवास योजना के तहत चुने गए 75 हजार लाभार्थियों को चाभी वितरित की। पीएम ने कुछ लाभार्थियों से संवाद भी किया । लखनऊ स्थित बाबा साहेब भीमराव अबंडेकर विश्वविद्यालय में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी चेयर का भी पीएम ने डिजिटल उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री स्मार्ट सिटी मिशन के अन्तर्गत आगरा, अलीगढ़, बरेली, झांसी, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, सहारनपुर, मुरादाबाद एवं अयोध्या में इंटीग्रेटेड कमाण्ड एंड कंट्रोल सेंटर, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं नगरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अमृत मिशन के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न शहरों में उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा निर्मित पेयजल एवं सीवरेज की कुल 4,737 करोड़ रुपये की 75 विकास परियोजनाओं का लोकर्पण और शिलान्यास भी पीएम ने किया। पीएम मोदी ने लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, गाजियाबाद और वाराणसी के लिए 75 स्मार्ट इलेक्ट्रिक बसों का फ्लैग ऑफ भी किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मुझे अच्छा लगा कि 3 दिनों तक लखनऊ में भारत के शहरों के नए स्वरूप पर देश भर के विशेषज्ञ एकत्र होकर मंथन करने वाले हैं। जो प्रदर्शनी लगी है, वो आजादी के इस अमृत महोत्सव में 75 साल की उपलब्धियां और देश के नए संकल्पों को भलीभांति उन्‍होंने कहा कि मुझे इस बात की भी खुशी होती है कि देश में पीएम आवास योजना के तहत जो घर दिए जा रहे हैं, उनमें 80 प्रतिशत से ज्यादा घरों पर मालिकाना हक महिलाओं का है या फिर वो संयुक्‍त मालिक हैं । प्रधानमंत्री ने कहा कि लखनऊ ने अटल जी के रूप में एक विजनरी और मां भारती के लिए समर्पित राष्ट्रनायक देश को दिया है। आज उनकी स्मृति में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में अटल बिहारी वाजपेयी चेयर स्थापित की जा रही है।

गरीबों के प्रति संवेदनहीन रही यूपी की पिछली सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पीएम ने कहा कि साल 2017 से पहले यूपी में जो सरकार थी वह गरीबों के लिए घर बनवाना ही नहीं चाहती थी। उन्होंने कहा कि हमें घर बनवाने के लिए मिन्नतें करनी पड़ती थीं। 2017 से पहले 18,000 घरों की स्वीकृति दी गई थी लेकिन जो सरकार यहां थी उसने 18 घर भी बनाकर नहीं दिए।

पीएम मोदी ने यूपीए सरकार पर भी निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि 2014 के बाद से हमारी सरकार ने पीएम आवास योजना के तहत शहरों में 1 करोड़ 13 लाख से ज्यादा घरों के निर्माण की मंजूरी दी है। इसमें से 50 लाख से ज्यादा घर गरीबों को सौंपे भी जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि मोदी ने क्या किया ? आज पहली बार मैं बताना चाहता हूं कि मेरे जो साथी झुग्गी-झोपड़ी में जिंदगी जीते थे, उनके पास पक्की छत नहीं थी, ऐसे तीन करोड़ परिवारों को लखपति बनने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत देश में जो करीब-करीब 3 करोड़ घर बने हैं, आप उनकी कीमत का अंदाजा लगाइए।

पीएम ने कहा कि शहरी मिडिल क्लास की परेशानियों और चुनौतियों को भी दूर करने के लिए हमारी सरकार ने बहुत गंभीर प्रयास किया है। रेरा कानून ऐसा एक बड़ा कदम रहा है। इस कानून ने पूरे हाउसिंग सेक्टर को अविश्वास और धोखाधड़ी से बाहर निकालने में बहुत बड़ी मदद की है। उन्होंने कहा कि एलईडी स्ट्रीट लाइट लगने से शहरी निकायों के भी हर साल करीब 1 हज़ार करोड़ रुपये बच रहे हैं।एलईडी ने शहर में रहने वाले लोगों का बिजली बिल भी बहुत कम किया है।

पीएम ने कहा कि भारत में पिछले 6-7 वर्षों में शहरी क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन टेक्नोलॉजी से आया है। देश के 70 से ज्यादा शहरों में आज जो इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर चल रहे हैं, उसका आधार टेक्नोलॉजी ही है। उन्‍होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों और स्ट्रीट वेंडर्स को बैंकों से जोड़ा जा रहा है। योजना से 25 लाख से ज्यादा गरीब दुकानदारों को 2500 करोड़ रुपये से अधिक की मदद दी गई है। इसमें भी यूपी के 7 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिला है।

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लोकसभा के शोले और रहीम चाचा की खामोशी

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सच्चिदा नन्द द्विवेदी एडिटर-इन-चीफ

हिन्दी सिनेमा की कालजई फिल्म शोले के रहीम चाचा का किरदार आपको जरूर याद होगा। उनका एक डायलॉग था जिसमें वो कहते है “इतना सन्नाटा क्यूँ है भाई” उस वक्त पूरे रामगढ़ में किसी के पास इसका जवाब नहीं था, कमोवेश ठीक वैसे ही हालात इस वक्त लोकसभा चुनाव में नजर आ रहे हैं। लोकसभा के चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं पर पूरे देश में कहीं भी ऐसा नजर नहीं आता कि हम अगले पाँच साल के लिए अपने नुमाइंदे चुनने जा रहे हैं। एक अजीब खामोशी नुमायाँ है। गांव, कस्बों और शहरों तक में होर्डिंग और पोस्टर नजर नहीं आ रहे हैं और न ही कानफोडू लाऊडस्पीकर पर वोट मांगने वालों का शोर सुनाई दे रहा है, चाय की टपरी और पान के खोखों पर जमा होने वाली भीड़ अपने होंठों को सिले हुए है।

एक वक्त था जब हम लोग चाय की टपरी, पान की दुकान और रास्तों के ढाबों से देश का मूड भांप लेते थे। मतदाताओं के मन में क्या चल रहा है इसका अंदाज लगाना आसान था। लेकिन आज स्थिति उलट है इन जगहों पर खड़ा आम आदमी आपसे ही उल्टा पूछ लेता है ‘और क्या चल रहा है’ इंसान-इंसान के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई है कि वो पब्लिक प्लेस पर अब राजनीतिक बात करने से गुरेज करने लगा है। वोटर अपने मन की बात जुबान पर नहीं लाना चाहता हैं क्यूंकी अब वो रेडियो पर ‘मोदी जी’ के मन की बात सुन रहा है और अपने मन की बात अपने मन में रखे हुए है। उसे डर है और ये डर मिश्रित चुप्पी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा लक्षण नहीं है।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण की तरह दूसरे चरण में भी वोटिंग 2019 के मुकाबले कम हुई है। पहले चरण में 21 राज्यों की 102 लोकसभा सीटों पर 64 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। जबकि पिछले लोकसभा चुनाव में उन सीटों पर भी 70 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ था। ऐसे ही इस बार दूसरे चरण में 13 राज्यों की 88 लोकसभा सीटों पर करीब 63 फीसदी वोट पड़े। यह 2019 के लोकसभा चुनाव में 70.09% मतदान के मुकाबले काफी कम था। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में वोटिंग उम्मीद से काफी कम रही। यूपी में 54.85%, बिहार में 55.08% , महाराष्ट्र में 57.83% , एमपी में 57.88 % वोटिंग हुई। सबसे अधिक वोट त्रिपुरा, मणिपुर, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में पड़े। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में सात मई को वोटिंग है। इसमें 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 95 सीट पर मतदान होगा, जिसके लिए 1351 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

जब 7 मई, 13 मई, 20 मई, 25 मई और 1 जून को तीसरे, चौथे, पांचवे, छठे और सातवें चरण का मतदान होगा तो इस दौरान देश के अधिकतर हिस्सों में गर्मी के साथ लू का असर दिखाई देगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान लगभग 72% निर्वाचन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 35°C या इससे अधिक हो सकता है। विशेष रूप से, 59 सीटों पर 40-42 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान का सामना करना पड़ सकता है। जबकि 194 सीटों पर 37.5-से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान देखा जा सकता है। लेकिन इस गर्मी के बीच क्षेत्रीय दलों के नेता काफी तेजी से अपने इलाके के मतदाताओं पर पकड़ बना रहे हैं और उन सवालों को उठा रहे हैं जिनसे देश का किसान, मजदूर और नौजवान चिंतित है। इसलिए उनके प्रति आम जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं इसलिए विपक्षी गठबंधन के नेताओं की रैलियों में भारी भीड़ आ रही है। जबकि भाजपा की रैलियों का रंग उसके मुकाबले फीका नजर या रहा है।

हालांकि रैली में आने वाली भीड़ जीत का पैमाना नहीं होती इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता। हर दल का अपना एक समर्पित काडर होता है। जबकि आज काडर के नाम पर ज्यादातर दलों के पास सत्ता के छत्ते से चिपकी रहने वाली मधुमक्खी ही ज्यादा नजर या रहीं है ये वो लोग हैं जिन्हें सत्ता की दलाली करने के अवसरों की तलाश होती है। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ जिसके पास काडर है कार्यकर्ता हैं वो भी खामोश नजर आ रहा है। बहरहाल लगातार कम होते मतदान ने नेताओं की धुकधुकी बढ़ा रखी है। सत्ता पक्ष मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए परेशान है तो विपक्ष कम प्रतिशत को अपने पक्ष में मानकर मुंगेरीलाल के सपने बुनने में मगन है।

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