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घर के अंदर वायु प्रदूषण से भी हो सकता है फेफड़ों को खतरा

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घर के अंदर का वायु प्रदूषण दीर्घकाल में फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीड़ित पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।

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सीओपीडी के कुछ सामान्य संकेतों और लक्षणों में सामान्य खांसी या बलगम वाली खांसी, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय, सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आदि शामिल हैं।

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के लिए सबसे प्रभावी और निवारक थेरेपी है तम्बाकू के धुएं से बचाव। दवा में ब्रोंकोडाइलेटर्स शामिल हैं, जो एयर पाइप के चारों ओर की मांसपेशियों को आराम देते हैं। ये वायुमार्ग को खोलने के साथ-साथ सांस लेने में आसानी पैदा करते हैं। सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय होता है।

भारत में लगभग 5.5 करोड़ लोग फेफड़ों की पुरानी अवरोधक बीमारी से पीड़ित हैं, और देश में मृत्यु दर के पांच प्रमुख कारणों में से तीन गैर-संक्रमणीय बीमारियां हैं और सीओपीडी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फिसेमा समेत फेफड़ों की निरंतर बढ़ने वाली सूजन की बीमारियों का वर्णन करने के लिए एक शब्द है- सीओपीडी, जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है।

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धन्य हैं “धन” के इस दौर में ”सरस्वती” के नए साधक-संपादक…

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से रायबरेली में मनाए जाने वाले आचार्य स्मृति दिवस 2020 के अवसर पर इस वर्ष का प्रतिष्ठित डॉ राम मनोहर त्रिपाठी लोक सेवा सम्मान 40 वर्ष बाद इंडियन प्रेस प्रयागराज से पुनर प्रकाशित हुई सरस्वती पत्रिका के संपादक प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला एवं अनुपम परिहार को संयुक्त रुप से समर्पित किया गया।

प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला

कार्यक्रम में प्रोसेसर सुख अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो पाए। सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार प्रयागराज से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पहुंचे थे। उन्होंने ही प्रोफेसर देवेंद्र शुक्ल का प्रतिनिधित्व भी किया। समिति के पदाधिकारियों ने सम्मान पत्र व प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र के साथ ही सम्मान राशि प्रदान की।

सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार

प्रोफ़ेसर देवेंद्र शुक्ला की सहमति से  अनुपम परिहार ने सम्मान के साथ दी गई धनराशि इंडियन प्रेस प्रयागराज के प्रबंधक सुप्रतीक घोष को सौंप दी। प्रधान संपादक देवेंद्र शुक्ला और सहायक संपादक अनुपम परिहार ने “सरस्वती” का संपादन अवैतनिक स्वीकार किया है। परिहार इसके पहले भी  प्रयागराज में एक व्याख्यान  में प्रतिभाग  करने पर  मिली धनराशि  इंडियन प्रेस को सौंप चुके हैं।

सरस्वती के संपादन के एवज में प्रधान संपादक एवं सहायक संपादक को “लक्ष्मी” स्वीकार नहीं है। हिंदी भाषी समाज में सरस्वती और आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एक-दूसरे के पर्याय और पूरक माने गए हैं। आचार्य द्विवेदी ने सरस्वती के संपादन से प्राप्त धनराशि काशी नागरी प्रचारिणी सभा को दान में दे दी थी। हम भी आचार्य द्विवेदी की उसी परंपरा का पालन करने का पूरा प्रयास करेंगे।

 

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