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पीएम मोदी के SPG कमांडो के पास हैं ऐसे चश्में, भूल जाइएगा बादशाह फिल्म का चश्मा

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आपने ध्यान दिया होगा कि चाहे दिन हो या रात बॉडीगार्ड हमेशा काला चश्मा ही पहने रहते हैं। फिर वो बॉडीगार्ड किसी राजनेता का हो या फिर अभिनेता का। बॉडीगार्ड काला चश्मा क्यों पहनते है, इसकी वजह आज हम आपको बताएंगे।

 

दरअसल, ये बॉडीगार्ड जब प्रधानमंत्री या किसी अन्य vvip के साथ चल रहे होते हैं या फिर खड़े होते हैं तो उनकी निगाह हर तरफ दौड़ती है। इस बात का किसी व्यक्ति को पता न चले की एसपीजी कमांडो किसको और कहां देख रहे हैं, इसलिए बॉडीगार्ड काले चश्मे पहनते हैं।

एसपीजी कमांडो को चश्मे की मदद से हमलावर के दिमाग को पढ़ना सिखाया जाता है। क्योकि आंखों से वो सब पढ़ा जा सकता है जो हमलावर सोच रहा होता है। इन्हें इस चीज की खास ट्रेनिंग दी जाती है।

सबसे खास वजह तो यह है कि अगर अचानक कोई विस्फोट हो जाए, बम फट जाए या गोलाबारी होने लगे तो स्वाभाविक है धुआ हो जाएगा। जिससे थोड़ी देर के लिए आखें बंद हो जाती हैं। लेकिन इन बॉडीगार्डस को हर हालत में अपनी आखों को खोलकर रखना होता है ताकि कोई घटना न घटे। ऐसे में ये काले चश्मे काफी मददगार साबित होते हैं।

कोई हादसा हो जाए या कुछ आंधी तूफान आ जाये तो ऐसे में आंखों को सेफ रखना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि ऐसे में किसी अप्रिय घटना को भी हमलावर अंजाम दे सकते हैं।

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मंदी पर मोदी सरकार के मंत्री ने दिया अजीबोगरीब बयान, जानकर चौंक जाएंगे आप

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नई दिल्ली। आर्थिक मंदी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से एक बार फिर अजीबोगरीब बयान दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रविशंकर प्रसाद के बाद रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगाड़ी ने मंदी की बात को खारिज करने के लिए अजीब तर्क दिया है।

उन्होंने कहा, ‘ एयरपोर्ट और ट्रेन फुल हैं। लोग शादी कर रहे हैं। ये बातें देश की अर्थव्यवस्था के ‘सही गति’ पर होने का इशारा दे रही हैं।’

रेल राज्यमंत्री अंगड़ी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में हर तीसरे साल मंदी आती है और फिर गति पकड़ लेती है। भारतीय अर्थव्यवस्था भी जल्द ही गति पकड़ लेगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसका सहारा लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इमेज को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में भारत ‘दुनिया का मेन्युफेक्चरिंग हब’ बन जाएगा। केंद्र सरकार की तरफ से मंदी के मुद्दे पर अजीब तर्क देने का यह पहला मामला नहीं है।

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