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अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचे का कोई धार्मिक महत्व नहीं, सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई दलील

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रामलला विराजमान की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचे का कोई धार्मिक महत्व नहीं है जबकि भगवान राम का जन्मस्थान ऐसी जगह है जिसके साथ हिन्दुओं की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए राम के जन्मस्थान को विस्थापित नहीं किया जा सकता है।

रामलला विराजमान की तरफ से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता के. परासरण ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि जन्मस्थान को किसी अन्य जगह विस्थापित नहीं किया जा सकता है जबकि मुसलमान अवाम के लिए इस मस्जिद का कोई विशेष महत्व नहीं है क्योंकि इससे अन्य मस्जिदों में नमाज अदा करने के अधिकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, “अयोध्या में कई दूसरी मस्जिदें हैं और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस स्थल का हिंदुओं के लिए खास धार्मिक महत्व है और इसे विस्थापित नहीं किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए तीर्थयात्रा एक धार्मिक परंपरा है मगर, मुसलमानों के लिए सिर्फ मक्का और मदीना तीर्थस्थल है और अयोध्या या बाबरी मस्जिद उनके लिए ऐसा कोई तीर्थस्थल नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ में न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर भी शामिल थे। परासरण ने पीठ के समक्ष अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि इस्माइल फारूकी मामले में 1994 में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की याचिका अनुरक्षणीय नहीं है। मामले में संविधान पीठ ने फैसला देते हुए कहा था कि मस्जिद नमाज अदा करने की धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा नहीं है।

याचिकाकर्ता एम. सिद्दीकी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने इससे पहले शीर्ष अदालत की पीठ को बताया कि उक्त आदेश संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक परंपरा की संकल्पना से पूरी तरह वंचित है। शीर्ष अदालत मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए ग्रीष्मावकाश के बाद छह जुलाई की तारीख निर्धारित की है। ( आईएएनएस)

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मोदी सरकार के फैसले पर भड़के बीजेपी सांसद, बोले-कोर्ट जाऊंगा

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नई दिल्ली। एअर इंडिया को बेचने की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को प्रारंभिक जानकारी वाला मेमोरंडम जारी करने के बाद स्वामी सरकार के खिलाफ खड़े हो गए।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट के जरिए फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह सौदा पूरी तरह से देश विरोधी है और मुझे कोर्ट जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हम परिवार की बेशकीमती चीज को नहीं बेच सकते।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एअर इंडिया को बेचने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।

इससे पहले भी वह सरकार की इस पहल पर सवाल खड़े कर चुके हैं। माना जा रहा है कि केंद्र के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी अड़चन पैदा हो सकती है।

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