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अन्तर्राष्ट्रीय

आईएस, आतंकवादी संगठनों ने 12 करोड़ डॉलर फिरौती वसूली

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संयुक्त राष्ट्र| इस्लामिक स्टेट (आईएस) तथा सीरिया एवं इराक में सक्रिय अन्य आतंकवादी संगठनों ने वर्ष 2004 से लेकर अब तक कम से कम 12 करोड़ डॉलर की फिरौती वसूली है। संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने यह जानकारी दी। प्रेस टीवी द्वारा मंगलवार को जारी एक रपट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद निरोधी कमेटी की एक बैठक में अलकायदा पर प्रतिबंधों की निगरानी कर रहे संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ योत्सना लालजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि आईएस तथा अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा अपहरण तथा फिरौती वसूलने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि इन संगठनों ने वर्ष 2004 से 2012 के बीच 12 करोड़ डॉलर की रकम फिरौती के रूप में वसूली की है।

लालजी ने कहा कि मध्यपूर्व, एशिया तथा अफ्रीका में सक्रिय आतंकवादी संगठन धन उगाहने के लिए अपहरण तथा फिरौती का सहारा ले रहे हैं, जो धन उगाही का अलकायदा का प्रमुख हथियार था। आईएस ने तीन अमेरिकियों समेत पश्चिमी देशों के कई नागरिकों को मौत के घाट उतारा है। एक युवा अमेरिकी महिला का सिर कलम कर दिया गया था। लालजी ने कहा कि अपने नागरिकों को छुड़ाने के लिए कई सरकारें आतंकवादियों को फिरौती की रकद दे रही हैं। हालांकि अमेरिका ने अपने नागरिकों को छुड़ाने के एवज में फिरौती देने से इंकार कर दिया था।

अन्तर्राष्ट्रीय

भारत में अवसरों की भरमार, पीएम मोदी के नेतृत्व में 10 सालों में देश ने अच्छी प्रगति की : वॉरेन बफे

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नई दिल्ली। बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन और सीईओ वॉरेन बफे भारत की निवेश की संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने रविवार को कंपनी की सालाना बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत में अवसरों की भरमार हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। बीते दस सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने सभी आर्थिक मानदंडों में अच्छी प्रगति की है। अब लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर (अनुमान वित्त वर्ष 2023-24) की जीडीपी के साथ भारत आर्थिक रूप से पांचवां सबसे बड़ा देश है। एक दशक पहले देश 1.9 ट्रिलियन डॉलर (मौजूदा बाजार मूल्य) की जीडीपी के साथ भारत 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस 10 साल की यात्रा में कई रिफॉर्म हुए जिसने देश को आर्थिक रूप से आगे बढ़ाया है।

रविवार को अपनी कंपनी की वार्षिक बैठक में वॉरेन बफेट ने कहा, भारत में नई संभावनाओं का पता लगाएं। यहां ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जिनको सर्च नहीं किया गया है या यहां मौजूद अवसरों पर ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, मुझे यकीन है कि भारत में बहुत सारे अवसर हैं। सवाल यह है कि क्या हमें उनके बारे में जानकारी है, जिसमें हम भाग लेना चाहेंगे। बफेट देश में संभावित प्रवेश की तलाश में हैं। भारत की जीडीपी ग्रोथ एक नए शिखर पर पहुंचने के लिए तैयार है। विनिर्माण और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों ने फिर से सुधार देखना शुरू कर दिया है और जीएसटी कलेक्शन नई ऊंचाई हासिल कर रहा है।

आरबीआई के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी ग्रोथ महामारी से पहले 2020 के दौरान दर्ज की गई 7 प्रतिशत से ऊपर बढ़ने के संकेत हैं। आईएमएफ के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, 2004 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 635 डॉलर थी। 2024 में देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़कर 2,850 डॉलर हो गई है, जो इसके समकक्ष देशों के लिए 6,770 डॉलर का 42 प्रतिशत है। इस महीने की शुरुआत में जारी एचएसबीसी सर्वे के अनुसार, मजबूत मांग के कारण भारत का विनिर्माण सेक्टर अप्रैल में मजबूत गति से बढ़ा। इसके अलावा विश्व चुनौतियों के बावजूद, एक लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न के साथ देश ग्लोबल स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम बना हुआ है।

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