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खेल-कूद

सुशील की पिटाई से सागर के सिर की टूट गई थीं कई हड्डियां, यही वजह बनी मौत का कारण

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नई दिल्ली। ओलिंपियन सुशील कुमार पर जूनियर पहलवान सागर धनखड़ की हत्या का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक़ सुशील ने लड़को के साथ मिल कर सागर को 45 मिनट तक पीटा। सुशील पर आरोप है कि उन्होंने बेसबॉल बैट हॉकी और डंडे से सागर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ सागर की बॉडी में मल्टीपल फ्रैक्चर मिले। रिपोर्ट के मुताबिक़ मौत का कारण सिर की हड्डियां टूटने और दिमाग में चोट लगने से हुई थी।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की जांच से पता चला कि सुशील ने अपनी गुंडे वाली छवि को बरकरार रखने के लिए ऐसा बड़ा अपराध किया। ओलिंपियन ने सागर का 2 साल को स्टेडियम में घुसने से पाबन्दी भी लगा रखी थी।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि सागर ने सुशील का फ्लैट पहले ही खाली कर दिया था। इस दौरान दोनों में बहस हो गयी और सागर को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। खबर ये भी है कि सुशील ने इससे पहले भी बहुत पहलवालो का करियर ख़त्म किया है।

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खेल-कूद

हॉकी में ओलंपिक पदक जीतकर बीमार पिता इलाज कराना चाहती हैं सोनीपत की निशा

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला हॅाकी टीम में चयनित होने वाली सोनीपत की निशा अपने दर्जी पिता का इलाज कराकर उन्हें नया घर देना चाहती है। बीमार पिता की हालत के चलते निशा को हॅाकी छोड़ना पड़ा था।

पिता को लकवा मारते ही निशा के घर की हालत खराब होना शुरू हो गई। तब निशा ने खेलना शुरू ही किया था। लेकिन केवल एक कमाऊ सदस्य होने के कारण निशा व उनकी दो बहनों को काम करना पड़ा।

निशा ने हॅाकी छोड़ दी पर उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनका साथ न छोड़ते हुए निशा को प्रेरित किया। यह कोच की प्रेरणा और निशा की मेहनत ही है कि वह टोक्यो ओलंपिक मे चयनित हो सकी। निशा बेबाकी से कहती हैं कि वह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर अपने पिता का बेहतर इलाज और घर देना चाहती है।

पिता ने कहां, अब देश का नाम रोशन करो

निशा के पिता दर्जी हैं। उनके लकवाग्रस्त होने के बाद उनका काम-धंधा बंद हो गया। निशा कहती है, उनके मामा ने उनकी बहुत मद्द की और उनके साथ उनकी बहनों ने भी बहुत काम किया।

अब उनकी शादी हो चुकी है और निशा की भी रेलवे में नौकरी लग चुकी हैं। लेकिन माता-पिता अब भी सोनीपत में छोटे से मकान में रहते हैं। इसलिए निशा अपने पिता का इलाज कराकर उन्हें एक नया घर देना चाहती हैं।

निशा बताती है कि सबसे पहले अपने ओलंपिक में चयनित होने की खबर उन्होंने अपनी कोच प्रीतम को दी। उसके बाद अपने पिता सोहराब को। पिता के मुंह से यही निकला कि जिसके लिए तुमनें मेंहनत ही उसका फल तुम्हें मिल गया। अब देश का नाम रोशन करो।

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