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मुख्य समाचार

भुक्ति सुख ने जीव को मूर्ख बना रखा है

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kripalu ji maharaj

साँचो दास न कबहुँ चह, पाँचहुँ मुक्ति बलाय।

चहइ युगल सेवा सदा, तिन सुख सुखी सदाय।।15।।

भावार्थ- श्रीकृष्‍ण का वास्‍तविक दास 5 प्रकार की मुक्ति नहीं चाहता। वह तो केवल श्‍यामा-श्‍याम के सुख के लिये ही उनकी सेवा चाहता है। एवं उन्‍हीं के सुख में सुखी रहता है।

व्‍याख्‍या- शास्‍त्रों में भुक्ति एवं मुक्ति को पिशाचिनी के समान बताया गया है। यथा-

भुक्तिमुक्तिस्‍पृहा यावत् पिशाची हृदि वर्तते।

तावद्भक्तिसुखस्‍यात्र कथमभ्‍युदयो भवेत् ।।

(भ. र. सिन्‍धु)

इन दोनों में भुक्ति का अभिप्राय है ब्रह्मलोक तक के सुख। यह सुख इन्द्रिय जन्‍य मायिक विषयों का है। पूर्व में बताया जा चुका है कि माया का जहाँ तक आधिपत्‍य है, वह सब सुख अनित्‍य, सीमित एवं परिणाम में घोर दुःखप्रद हैं। इन सुखों की 3 कक्षायें हैं। सात्त्विक, राजस, तामस। यथा वेद-

पुण्‍येन पुण्‍य लोकं नयति पापेन। पापमुभाभ्‍यामेव मनुष्‍य लोकम् ।

(माठर श्रुति)

अर्थात् सात्त्विक कर्म का फल सात्त्विक, राजस का राजस एवं तामस का फल तामस मिलता है। तीनों ही मायिक हैं अनादिकाल से भुक्ति सुख ने जीव को मूर्ख बना रखा है अतः इसे चुड़ैल कहा है। यह पीछा ही नहीं छोड़ती।

नेशनल

अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उस याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा, जिसमें केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करेगी।

दिल्ली में शराब नीति घोटाले से उपजे मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया है। केजरीवाल पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुके हैं कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हर लोकतंत्र में जरूरी हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव के समय उनकी गिरफ्तारी लोकतंत्र पर हमला है।

केजरीवाल ने ईडी की कार्रवाई के खिलाफ कहा कि जिस तरह से उन्हें गिरफ्तार किया गया और जिस समय लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया, जब आचार संहिता लागू हो चुकी थी। इससे साफ है कि एजेंसी बिना किसी कारण के जानबूझकर उन्हें परेशान कर रही हैं। चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से ही उनकी गिरफ्तारी हुई है।

तिहाड़ जेल जाने के बाद केजरीवाल अपने स्वास्थ्य को लेकर भी जेल प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। उनका दावा है कि केंद्र सरकार के इशारे पर जेल प्रशासन उन्हें इंसुलिन नहीं दे रहा है, जबकि वह लंबे समय से शुगर के मरीज हैं।

 

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