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चंद्रयान 2 को लेकर इसरो ने दी ये बड़ी खुशखबरी

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नई दिल्ली। चंद्रमा पर लैंड करने से कुछ सेकेंड पहले विक्रम लैंडर का संपर्क केंद्र से टूट जाने के बाद पूरे देश में मायूसी छा गई थी लेकिन इसके बाद इसरो की नई सूचना देशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी लेकर आई है।

इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 के सटीक प्रक्षेपण और मिशन प्रबंधन की वजह से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा ऑर्बिटर सात वर्ष तक काम करता रहेगा। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि ऑर्बिटर केवल 1 साल तक ही काम कर पाएगा। साथ ही इसरो की ओर से जारी किए गए बयान में इस चंद्र मिशन को 90 से 95 प्रतिशत तक सफल भी बताया है।

चंद्रयान-2 एक प्रकार से 3-इन-1 मिशन था। इसमें ऑर्बिटर के साथ लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान भी भेजे गए थे। एक ही मिशन से इसरो का प्रयास चंद्रमा की सतह, सतह से नीचे और बर्हिमंडल, तीनों पर शोध करना था।

ऑर्बिटर 20 अगस्त 2019 को ही चंद्रमा की कक्षा में सफलता से दाखिल होकर करीब 120 किमी ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है और बर्हिमंडल व सतह की तस्वीरें भी भेज चुका है। इसरो के अनुसार ऑर्बिटर में 0.3 मीटर रिजोल्यूशन का अत्याधुनिक कैमरा लगा है, जो अब तक किसी भी चंद्र मिशन में नहीं लगाया गया।

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निर्भया के दोषियों को अब इस तारीख को होगी फांसी, कोर्ट ने जारी किया नया डेथ वारंट

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नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों की फांसी की नई तारीख आ गई है। कोर्ट ने सभी दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक चारों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। चारों दरिंदों के पास अब केवल 350 घंटे ही शेष हैं। बता दें कि शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी थी।

इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने की तारीख तय की थी, लेकिन इसके बाद दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के सक्षम दया याचिका लगा दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा निर्भया के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया है।

वहीं, इस मामले में नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि जब तक दोषियों को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता है, तब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा। मुझको पिछले सात साल से तारीख पर तारीख दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम ऐसा है कि जहां दोषी की सुनी जाती है। हर जगह निर्भया के गुनहगारों का ही मानवाधिकार देखा जा रहा है। हमारा मानवाधिकार कोई नहीं देख रहा है।

 

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