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प्रादेशिक

पुलिस के सामने ही दलित युवक को तलवार से काट डाला, ये थी वजह

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नई दिल्ली। गुजरात के अहमदाबाद में ऑनर किलिंग का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां वारमोर गांव में एक 25 साल के दलित युवक की उसके ऊंची जाति के ससुराल वालों ने पुलिस के सामने ही मौत के घाट उतार दिया। मृतक का नाम हरेश कुमार सोलंकी है। हरीश को उसकी पत्नी उर्मिला के घर के बाहर आठ लोगों ने तलवार लाठी-डंडो से पीटकर मार डाला।

पुलिस के मुताबिक घटना के वक्त वहां महिला हेल्पलाइन टीम भी मौजूद थी। फिलहाल हत्या में शामिल आठों आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। हत्या के मुख्य आरोपी उर्मिला के पिता दशरथसिन्ह जाला की तलाश कर रही है।

पुलिस के मुताबिक हत्या के पीछे की वजह प्रेम विवाह है। कच्छ के गांधीधाम के रहने वाले सोलंकी की शादी उर्मिला जाला से करीब छह महीने पहले हुई थी। लेकिन मई महीने में ही उसके माता-पिता उसे वारमोर वापस ले आए थे। पुलिस के अनुसार, उर्मिला अभी दो महीने की गर्भवती है और लापता है।

जब सोलंकी को पता चला कि उर्मिला गर्भवती है, तो उसने 181 अभयम टीम की मदद से ससुराल वालों को समझाने की कोशिश की। अभयम 181 हेल्पलाइन खासतौर पर मुश्किल में फंसी महिलाओं की मदद के लिए है। इसमें काउंसलर्स की टीम होती है। लेकिन सोलंकी के मामले में काउंसलर्स के साथ एक महिला कॉन्स्टेबल भी उसके ससुराल पहुंची थी।

पुलिस के अनुसार, जब काउंसलर उर्मिला के घरवालों को समझाने की कोशिश कर रही थी, उस वक्त सोलंकी घर के बाहर खड़ी एक सरकारी कार में बैठा था। सोलंकी के साथ जाने वाली काउंसलर भाविका ने पुलिस को बताया, ‘काउंसलिंग करीब 20 मिनट तक चली। सोलंकी कार की अगली सीट पर ड्राइवर के साथ बैठा था।

काउंसलिंग शाम करीब 7 बजे खत्म हुई। हम घर से बाहर निकल कर कार तक पहुंचे। उर्मिला के पिता दशरथसिन्ह भी वहां आठ लोगों के साथ पहुंच गए। उन लोगों ने सोलंकी को कार से बाहर खींचा और तलवारों, चाकूओं, डंडों और रॉड्स से उस पर वार करने लगे। उन्होंने अभयम की टीम पर भी हमला किया। हमने तुरंत पुलिस को कॉल किया।

पुलिस ने अपनी एफआईआर में दशरथसिन्ह जाला को मुख्य आरोपी बनाया है। अहमदाबाद रूरल के एससी/एसटी सेल के डिप्टी एसपी पीडी मानवर ने कहा, ‘हमने आरोपियों को पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं। उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की पूरी कोशिश की जा रही है।’

उत्तराखंड

सीएम त्रिवेंद्र ने सचिवालय में की अहम बैठक, लापरवाह अधिकारियों पर हो सकती है कार्रवाई

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में सीएम डेशबोर्ड पर केपीआई के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा की है।

उन्होंने कहा कि सेवा के अधिकार में अधिसूचित सेवाएं ऑनलाईन भी उपलब्ध होनी चाहिए। ई-डिस्ट्रिक्ट में वर्तमान की सेवाओं के साथ ही अन्य सेवाओं को भी शामिल किया जाए। जो जिला इसमें बेहतर प्रदर्शन करेगा, उसे पुरस्कृत किया जाएगा। विभागों को डिजी-लॉकर से जोड़ने के लिए सचिव समिति द्वारा विचार किया जाए। एक ही एप्प के अंतर्गत सभी सुविधाएं उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के अधिकार में सेवाएं निर्धारित समय में दी जा रही है या नहीं, इसके लिए सतत मॉनिटरिंग की जाए। सीएम हेल्पलाईन पर वर्तमान में प्रातः 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक संचालित की जा रही है। रात्रि 10 बजे से सुबह 8 बजे तक जो भी कॉल आती हैं, उनकी रिकार्डिंग की व्यवस्था की जाए और उन्हें संबंधित अधिकारियों को अग्रसारित किया जाए।

सीएम हेल्पलाईन में सभी स्तरों के अधिकारियों की परफोरमेंस वेल्युशन किया जाए। लापरवाह अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए। प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक डिजीटल विलेज के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। ताकि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें।

बैठक में बताए गए मुख्य बिंदु –

स्टेट डाटा सेंटर के अंतर्गत वर्तमान में 12 विभाग जुड़े

स्वान से 1474 कार्यालय जुड़ चुके हैं

मार्च 2020 तक 164 कार्यालय और जोड़ दिए जाएंगे

इन्वेस्टर्स समिट के बाद आईटी में 2286 करोड़ रूपए की ग्राउंडिंग हो चुकी है

सीएम डेशबोर्ड से 33 विभाग जुड़े हैं

पीएमजी-दिशा  में युवाओं को डिजीटल साक्षरता की ट्रेनिंग दी जा रही है

 

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