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मुंबई फुटओवर ब्रिज हादसाः 5 लोगों की मौत, 36 घायल

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मुंबई। (द्वारकेश बर्मन) छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के पास हुए फुट ओवरब्रिज हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई जबकि 36 लोग घायल हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।

 

इस बारे में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री विनोद तावड़े ने कहा है कि ब्रिज की कंडीशन खराब नहीं थी। मंत्री ने कहा कि रेलवे और बीएमसी इसकी जांच करेंगे।

 

मंत्री विनोद तावड़े ने कहा, ‘ब्रिज का एक स्लैब गिरा है। रेलवे और बीएमसी इसकी मेंटनेंस के बारे में जांच करेंगे। ब्रिज खराब कंडीशन में नहीं था, इसमें छोटी-मोटी रिपेयरिंग की जरूरत थी, जोकि जारी थी। काम पूरा नहीं हुआ फिर भी इसे चालू रखा गया था, इसके बारे में भी जांच की जाएगी।’  बता दें कि हादसे में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ब्रिज के बाकी स्लैब को भी अब गिराया जा रहा है।

 

इस हादसे पर दुख जताते हुए महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, ‘मुंबई में टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग के पास हुए फुटओवर ब्रिज हादसे से की खबर सुनकर कष्ट हुआ। अभी बीएमसी कमिश्नर और मुंबई पुलिस के अधिकारियों से बात की है और उन्हें निर्देश दिए हैं कि वे रेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर काम करें और तेजी के साथ राहत और बचाव कार्य करें।’

 

डीआरएम बोले- ब्रिज के देखरेख का काम बीएमसी का

रेलवे के सूत्रों के अनुसार, इस ब्रिज के मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिसे देखते हुए इलाके में बड़े स्तर पर राहत कार्य शुरू कराए गए हैं। मुंबई के जिस स्थान पर यह हादसा हुआ उससे कुछ ही दूरी पर मुंबई पुलिस और मुंबई महानगरपालिका के मुख्यालय स्थित हैं। सेंट्रल रेलवे के डीआरएम डीके शर्मा के अनुसार, जिस ब्रिज के गिरने से यह हादसा हुआ उसकी देखरेख का काम बीएमसी करती है। उन्होंने बताया कि ब्रिज का निर्माण कार्य रेलवे ने कराया था, लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी बीएमसी की ही थी।

 

पुल के नीचे मौजूद थे तमाम लोग:-

अब तक मिली सूचना के मुताबिक, राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ, मुंबई पुलिस और रेलवे पुलिस की टीम को भी मौके पर लगाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस वक्त यह हादसा हुआ ब्रिज के नीचे बड़ी संख्या में लोग और वाहन मौजूद थे। ऐसे में इस पुल के मलबे में कई लोग दबे हो सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए एनडीआरएफ और पुलिस की टीम जल्द से जल्द लोगों को बाहर निकालने के प्रयास कर रही है।

 

नेशनल

उड़ान भरने के लिए राजनाथ सिंह ने आखिर क्यों चुना तेजस, जानें यहां

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नई दिल्ली। राजनाथ सिंह गुरुवार को बेंगलुरू में जी-सूट में पूरी तरह से तैयार तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) में उड़ान भरने वाले पहले रक्षा मंत्री बन गए हैं। उन्होंने कहा कि वह उड़ान से रोमांचित थे और उन्होंने उड़ान भरने के लिए इस विमान को इसलिए चुना, क्योंकि यह स्वदेशी रूप से विकसित किया गया था। विमान को वायुसेना (आईएएफ) के वरिष्ठ अधिकारी एयर वाइस मार्शल एन। तिवारी ने संचालित किया था।

सिंह ने कहा, “मैं उड़ान से रोमांचित था। यह मेरे लिए बहुत सहज और आरामदायक उड़ान थी। मैं इसका आनंद ले रहा था। मुझे देश के वैज्ञानिकों के साथ-साथ तेजस विमान के विकास पर काम करने वाले संगठनों पर गर्व है। आज, कई अन्य देशों में तेजस की मांग है। हम एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जिसमें हम न केवल लड़ाकू विमान निर्यात कर सकते हैं, बल्कि अन्य देशों को भी रक्षा उपकरण मुहैया करा सकते हैं।”

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने उड़ान भरने के लिए तेजस विमान को क्यों चुना, इस पर सिंह ने कहा कि यह जेट ‘स्वदेशी रूप से विकसित’ है, इसलिए मैंने इसे चुना। हालांकि 17 जनवरी 2018 को पूर्व रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने राजस्थान के जोधपुर हवाईअड्डे से वायुसेना के सुखोई -30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। वह ‘सह-पायलट’ के रूप में फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली पहली महिला रक्षामंत्री भी थीं।

वहीं पूर्व राष्ट्रपति, प्रतिभा पाटिल और एपीजे अब्दुल कलाम ने 25 नवंबर, 2009 और 8 जून, 2006 को पुणे से एसयू-30 में उड़ान भरी थी। प्रतिभा पाटिल पहली महिला राष्ट्रपति थीं, जिन्होंने यह उड़ान भरी थी, जबकि एक सैन्य लड़ाकू में उड़ान भरने वाले कलाम पहले राष्ट्रपति बने थे।

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