Connect with us

नेशनल

राम मंदिर के लिए 4 साल से एक पैर पर खड़े हैं ये बाबा!

Published

on

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों में राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बना रहे है। दोनों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द राम मंदिर पर संसद में कानून लाए।

राम मंदिर निर्माण को लेकर जहां एक ओर नेता संघर्ष कर रहे हैं वहीं एक ऐसे बाबा भी हैं जिन्होंने मंदिर निर्माण को लेकर दृढ़ संकल्प ले रखा है।

खड़ेश्वरी बाबा पिछले 3 साल से एक पैर पर खड़े हैं उनका संकल्प है कि जब तक अयोध्या और उनके गांव में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता तब तक वह नहीं बैठेंगे।

बाबा रूपगिरी उर्फ खड़ेश्वरी बाबा मूलतः गाजियाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने 3 साल से अन्न का दाना भी नहीं खाया है और सिर्फ फलाहार करते हैं।

बताया जाता है कि खड़ेश्वरी बाबा ने अपने गुरु दूधेश्वर महादेव मंदिर के महंत स्वामी नारायण गिरि के सामने यह संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर नहीं बनेगा तब तक वो एक पैर पर खड़े रहेंगे। वो इस संकल्प को पिछले चार सालों से लगातार निभा रहे हैं।

चौबीसों घंटे एक झूले के सहारे खड़े रहने वाले खड़ेश्वरी बाबा झूले पर खड़े होकर ही ईश्वर की आराधना करते हैं और यहीं खड़े-खड़े नींद भी पूरी कर लेते हैं। वर्तमान में रूपगिरि जी महाराज नागा सन्यासियों के साथ जूना अखाड़े में हैं। उन्हें देखने दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।

 

नेशनल

बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

Published

on

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending