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मुस्लिम ने बेटे की तरह किया हिंदू शिक्षक का अंतिम संस्कार, उसके बाद जो किया वो हैरान कर देने वाला है!

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नई दिल्ली। हमारे देश में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसालें पेश की जाती है यही तहजीब और भाईचारा भारत को दूसरे देशों से अलग करती है। पश्चिम बंगाल में ऐसी ही गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की गई जिसके बारे में जानकर आपके भी आखों में आंसू आ जाएंगे। यहां एक मुस्लिम शिक्षक ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से अपने एक हिंदू साथी का अंतिम संस्कार किया है। मुस्लिम शख्स ने इसके पीछे जो वजह बताई वो भावुक कर देने वाली है।

मुस्लिम शिक्षक ने बताया कि उनके हिंदू दोस्त संजन कुमार विश्वास भी उनके साथ ही पढ़ाते थे। हालांकि वो उम्र में अशफाक से काफी बड़े थे। हाल ही में उनकी मृत्यु हो गई। अब चूंकि संजन कुमार के परिवार में सिर्फ उनकी तीन बेटियां ही हैं, इसलिए उन्होंने एक साथी और एक बेटे की तरह फर्ज निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, इसके बाद जो अशफाक ने किया वो और भी भावुक कर देने वाला है। अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने अपना सिर और मूंछें भी मुड़वा लीं। साथ ही वो परिवार के साथ 11 दिन का शोक भी मनाएंगे।

अशफाक का कहना है कि संजन कुमार उनके पिता के समान थे। उनसे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने बताया कि संजन कुमार साल 2005 में रिटायर हो गए थे और उनका स्कूल आना-जाना बंद हो गया था, लेकिन उनकी दोस्ती हमेशा बरकरार थी, क्योंकि उनसे उन्हें जो सबसे बेहतरीन चीज सीखने को मिली थी, वो है मानवता।

अशफाक ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, ‘जिस साल स्कूल अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा था, उसी साल स्कूल में मेरी नियुक्ति हुई थी। स्कूल में ऐसे कई लोग थे, जो धर्म के आधार पर मेरी नियुक्ति का विरोध कर रहे थे, लेकिन संजन कुमार हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। सिर्फ यही नहीं, जब तक मुझे वहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल गया, मैं उन्हीं के घर पर रूका रहा।’ अशफाक ने कहा कि वो धर्म में नहीं बल्कि मानवता में विश्वास करते थे और ये चीज मैनें उन्हीं से सीखी है और इसीलिए उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया।

 

 

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मोदी की सुनामी के बाद मेनका गांधी ने राहुल पर कसा तंज, कहा-ये बच्चों का खेल नहीं

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों में भारत की जनता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को साल 2014 से भी बड़ा जनादेश दिया है।

इन चुनावों में भाजपा ने पिछले बार से ज्यादा अच्छा प्रदर्शन करते हुए 303 सीटें हासिल की। भाजपा की इस प्रचंड जीत के बाद पूरे देश में पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।

पीएम मोदी की इस जीत की विशालता को इस बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दर्ज की गई इस जीत ने राजीव गांधी की 1984 के वोट शेयर पाने के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है।

2014 से बड़ी बीजेपी की इस जीत में कांग्रेस के कई दिग्गज अपना किला नहीं बचा सके। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने गढ़ अमेठी में लगभग 38 हजार वोटों से हार गए।

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की इस करारी हार पर मोदी सरकार की मंत्री और रिश्ते में राहुल की चाची मेनका गांधी ने तंज कसा है। मेनका ने कहा है कि राजनीति कोई बच्चों का खेल नहीं है।

मेनका ने कहा कि उनकी तरफ से कैंपेन में कोई भी सही बात नहीं उठाई गई, गाड़ी में बैठ हाथ हिलाने से इलेक्शन नहीं बनता है। अगर राजनीति करनी है तो ठीक से करें और राजनीति गंभीरता से करें।

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