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‘पेट्रोल, डीजल के दाम घटेंगे’

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने मंगलवार को कहा कि आगामी दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी। प्रधान ने कहा कि मोदी सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की इच्छुक है।

उन्होंने कहा कि एक जुलाई से पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) तेल उत्पादन बढ़ाएंगे और इससे कीमतों घटने में मदद मिलेगी।

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन का लोगो

ओपेक (ऑगेर्नाइजेशन ऑफ पेट्राोलियम एक्सपोटिर्ंग कंट्ररीज) की वियना में हुई बैठक में शुक्रवार को कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर रोजाना 10 लाख बैरल करने का फैसला लिया गया। इस बैठक में ओपेक में शामिल 14 देशों के अलावा रूस समेत गैर-ओपेक तेल उत्पादक देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे।

भारत में कच्चे तेल की रोजाना खपत 45 लाख बैरल है जिसका 83 फीसदी आयात किया जाता है और भारत द्वारा कुल आयातित कच्चे तेल का 83 फीसदी आयात ओपेक देशों से होता है। ऐसे में अगर ओपेक और रूस की अगुवाई में सहयोगी देश अगर कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाता है तो निस्संदेह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में कमी आएगी जिसका फायदा भारत को मिलेगा।

भारत में तेल के सस्ता होने पर ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने दो दिन पहले कहा, ओपेक का फैसला अगर लागू होता है तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अल्पावधि में कच्चे तेल की कीमतें घटेंगी जिससे भारत में तेल का आयात सस्ता होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में डीजल और पेट्रोल की कीमतें नियंत्रण में रह सकती हैं, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती मांग के मद्देनजर आगे 2019 में कीमतों पर नियंत्रण रखना मुश्किल होगा।”

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दिल्ली हिंसा: पुलिस को फटकार लगाने वाले जज का हुआ तबादला, कांग्रेस ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को फटकार वाले जज एस मुरलीधर का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में कर दिया गया है। सुप्रीम कॉलिजियम ने बीती 12 फरवरी को जस्टिस मुरलीधर के तबादले को लेकर सुझाव दिया था जिसके बाद बुधवार को इससे संबंधित नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे के साथ विचार-विमर्श करने के बाद फैसला लिया है।

वहीँ, जज के तबादले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस फैसले को दुखद बताया। इसबीच उनके भाई तथा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्यायमूर्ति लोया के याद करते हुए केंद्र सरकार पर कटाक्ष किया, जिनकी मौत पर राजनीतिक विवाद हुआ था। प्रियंका ने ट्वीट किया, “वर्तमान स्थिति को देखते हुए न्यायमूर्ति मुरलीधर का आधी रात को ट्रांसफर चौंकाने वाली घटना नहीं है, लेकिन यह दुखद और शर्मनाक है।”

स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए उन्होंने आरोप लगाया, “लाखों भारतीय नागरिकों को ईमानदार न्यायपालिका पर विश्वास है, लेकिन न्याय को विफल करने और उनके विश्वास को तोड़ने का सरकार का प्रयास दुस्साहस भरा है।” इसी दौरान उनका साथ देते हुए राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर दिया, “बहादुर जज लोया की याद आई, जिनका ट्रांसफर नहीं हुआ था।” न्यायाधीश बी.एच. लोया सोहराबुद्दीन मामले की सुनवाई कर रहे थे, जब दिसंबर 2014 में उनकी नागपुर में संदिग्ध मौत हो गई थी। कानून एवं न्याय मंत्रालय ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर का स्थानांतरण (ट्रांसफर) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट कर दिया था।

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