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टीवी पर दिखने वाले इस बाबा पर युवती ने लगाया आरोप, अपने चेलों के साथ मिल कर बार-बार किया गंदा काम

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नई दिल्ली। कथित संत रामपाल और गुरमीत राम रहीम के बाद एक और बाबा पुलिस के शिकंजे में है। स्वयंभू संत दाती महाराज के खिलाफ उनकी एक शिष्या ने रेप का एक मामला दर्ज कराया है। शिष्या का आरोप है कि दाती महाराज ने दो साल पहले अपने शिष्यों के साथ ये गंदा काम किया था।

बाबा

पीड़िता ने अपनी शिकायत में दाती महाराज पर डराने धमकाने का भी आरोप लगाया है। वहीं पीड़िता के पिता ने बताया कि उस समय उन्होंने अपनी बेटी को दाती महाराज के संरक्षण में उनके आश्रम में ही छोड़ दिया था।

पुलिस ने कहा कि मामला रविवार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376, 377, 354 और 34 के तहत पंजीकृत किया गया है। पुलिस ने बताया कि महिला द्वारा दिल्ली स्थित श्री शनिधाम ट्रस्ट के संस्थापक व उनके सहयोगियों के खिलाफ आरोप लगाए जाने के कुछ दिनों बाद मामला दर्ज किया गया है।

आरोपियों से मामले के संबंध में जल्द पूछताछ की जाएगी और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई बढ़ेगी।” बता दें कि दाती महाराज ने शनि को दुश्‍मन नहीं बल्‍कि मित्र बताया था। इसी को लेकर वो खासा सुर्खियों में भी आए थे। दाती महाराज नियमित रूप से राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर आते हैं।

 

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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