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भारत में है ऐसी जगह जहां शादी से पहले मनाया जाता है हनीमून, मां-बाप खुद छोड़ते हैं दरवाज़े तक

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भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोग शादी के बाद हनीमून पर जाते हैं। इसमें कोई नई बात नहीं है। लेकिन जो खबर हम आपको बताने जा रहे हैं उसमे कुछ नई बात है। भारत में एक जगह ऐसी है जहां हनीमून, शादी से पहले मनाया जाता है। ये कोई अपराधिक मामला नहीं है या शोषण का मुद्दा नहीं है बल्कि इस गाँव की परंपरा है। इस परंपरा के तहत माँ-बाप खुद अपनी बेटी को दरवाज़े तक छोड़ कर आते हैं। अब बताते हैं तफ़सील से।

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छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक ऐसी जनजाति है, जहां शादी से पहले हनीमून की इजाजत दी जाती है। यह परंपरा ‘गोंड’ जनजाति में प्रचलित है, जिसे ‘घोटुल’ कहा जाता है। ‘गोड’ जनजाति के लोग मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ व झार से हैं। इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य किशोरों को घर-गृहस्थी की तमाम जिम्मेदारियों के बारे में शिक्षित करना है। ‘गोंड’ नाम की ये जनजाति छत्तीसगढ़ से झारखंड तक के जंगलों में पाई जाती है। इस जनजाति का एक समुदाय है ‘मुरिया’ और इसी समुदाय के लोगों की परंपरा है ‘घोटुल’। ‘घोटुल’ को पुराने ज़माने में इस जनजाति के युवकों को शिक्षा देने के लिए चलाया गया था।

‘घोटुल’ परंपरा से शिक्षा लेने वाले लड़कों को ‘चेलिक’ और लड़कियों को ‘मटियार’ कहा जाता है। कहा जाता है कि ‘घोटुल’ नामक इस परंपरा को इस जनजाति के ‘लिंगोदेव’ नामक एक देवता ने शुरू किया था जिनको ‘लिंगो पेन’ नाम से भी जाना जाता है।

#honeymoon #India #lifestyle

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कहानी संग्रह ‘आकाश में कोरोना घना है..’ का हुआ विमोचन

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रायबरेली के फिरोज गांधी कॉलेज सभागार में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति कार्यक्रम में 21 नवंबर को कोरोना संकट काल पर केंद्रित कहानी संग्रह “आकाश में कोरोना घना है..” का विमोचन पद्मश्री सुधा वर्गीज, प्रख्यात गीतकार मनोज मुंतशिर, सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार, नई दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार प्रेम प्रकाश और समाजसेवी मुकेश बहादुर सिंह ने किया। संग्रह की कहानी लेखिका सना आफरीन और गौरव अवस्थी ने विमोचन संपन्न कराया।

कोरोना संकटकाल पर केंद्रित इस कहानी संग्रह में देश भर के लेखकों-पत्रकारों की 29 कहानियां संग्रहीत हैं।पत्रकार गौरव अवस्थी द्वारा संपादित कोरोना संकट पर केंद्रित यह कहानी संग्रह देश में पहला ऐसा संग्रह है, जिसमें कोरोना संकट का आंखों देखा सच समाहित है।

लिटिल बर्ड पब्लिकेशंस नई दिल्ली से प्रकाशित इस संग्रह को पाठकों ने हाथों हाथ लिया है और इस कहानी संग्रह को देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों ने काफी पसंद किया है।

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