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‘जुमे की नमाज के लिए न जाएं मुस्लिम शिक्षक’

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दिल्ली सरकार ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) से कहा है कि स्कूल अवधि के दौरान मुस्लिम शिक्षकों को जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

डीएमसी के अध्यक्ष जराफुल इस्लाम खान ने बताया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने लिखित प्रतिक्रिया में कहा है, शिक्षक शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा करने के लिए अपनी कक्षाओं को छोड़कर नहीं जा सकते, क्योंकि इससे विद्यार्थियों के हितों को नुकसान पहुंचता है।

खान ने कहा, उन्होंने(शिक्षा विभाग) कहा है कि नियमों में ढील नहीं दी जा सकती और अपराह्न् एक बजे से शुरू होने वाली कक्षा के लिए शिक्षकों को अपराह्न् 12:45 बजे तक स्कूल पहुंचना होगा।

इससे पहले शिक्षकों ने आयोग से शुक्रवार को नमाज अदा करने के लिए जाने देने का आग्रह किया था, जिसके बाद इस संबंध में शिक्षा विभाग और तीनों नगर निगमों की प्रतिक्रिया मांगी गई थी।

खान ने कहा, नगर निगमों ने इस संबंध में अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

उन्होंने कहा, शिक्षकों ने मुझसे कहा कि 1954 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार, कर्मचारी अपने वेतन से एक निश्चित राशि देने के बाद नमाज अदा करने जा सकते हैं। हमने गृह विभाग को इस संबंध में लिखा है कि क्या इस नियम को अभी भी लागू किया जा सकता है।

खान के अनुसार, गृह मंत्रालय से इस संबंध में अभी जवाब नहीं आया है।

 

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सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनन्द बर्द्धन ने की बैठक

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प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को एनआईसी, सचिवालय में राजकीय और अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्यों और हर जनपद के नोडल अधिकारियों के साथ वीडियो कॉफ्रेंसिग के ज़रिए से बैठक ली।

उन्होंने कहा कि सभी महाविद्यालयों में शिक्षक टीचिंग प्लान, पाठ्यक्रम पूर्ण होने की स्थिति, शिक्षकों की तैनाती, छात्र-छात्राओं की संख्या, एडूसेट के माध्यम से शिक्षण कार्य, नेट वर्क कनेक्टिविटी की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई।

जिन दूरस्थ स्थित महाविद्यालयों में कतिपय विषयों में शिक्षकों की तैनाती नहीं है और स्थानीय स्तर पर प्राचार्य के विज्ञापन निकालने के पश्चात भी शिक्षक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, वहां यह निर्देश दिए गए कि निदेशालय स्तर से उन महाविद्यालयों के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया जाए और उन दूरस्थ महाविद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की जाए।

उन्होंने कहा कि सभी स्नात्तकोत्तर महाविद्यालयों में 10-20 बच्चों का ग्रुप बनाकर मेन्टरशिप की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए गए। महाविद्यालयों में स्थित लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम पुस्तकों के साथ रिफ्रेन्सबुक और कई प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं से सम्बन्धित पुस्तकें/सामग्री भी सम्मलित करने और पाठ्यक्रम से सम्बन्धित नावेललोरिएट की पुस्तकों की भी व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया गया।

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