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वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, बिना कीमोथेरेपी के कैंसर का इलाज हुआ संभव

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नई दिल्ली। बचपन में जब हम छोटे थे तो अक्सर सुना करते थे कि कैंसर एक लाइलाज बीमारी है। फिर कुछ बड़े हुए तो यह पता चला कि कैंसर का इलाज खोज लिया गया है। वक्त रहते अगर कैंसर का पता चल जाए तो कैंसर का इलाज संभव है।

कैंसर के इलाज में जिस थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है उसे कीमोथेरेपी कहते हैं। अब कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने कीमोथेरेपी और अन्य दवाओं का अब विकल्प ढूढ लिया है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि कीमोथेरेपी के दौरान कैंसर सेल्स के साथ दूसरे सेल्स को भी नुकसान पहुंचता है। फिलहाल वैज्ञानिकों ने अभी चूहों पर ही सफल प्रयोग किया है। इसे मानव शरीर पर लागू करने में अभी काफी वक्त है लेकिन पहले ही पायदान पर प्रयोग को सफलता मिलने से वैज्ञानिक उत्साहित हैं।

यह सफल प्रयोग 11 वैज्ञानिकों की टीम ने क्लेवलैंड क्लीनिक, अमेरिका में किया, जो विश्व में दूसरे स्थान पर है। वैज्ञानिकों की टीम का नेतृत्व क्लेवलैंड क्लीनिक में कैंसर बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. यांग ली ने किया, बीते साल वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय आए थे और यहां सात साल से 14 जुलाई तक कैंसर जागरूकता कार्यक्रम के तहत उनके कई लेक्चर भी आयोजित किए गए थे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जैव रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. मुनीश भी इस टीम का हिस्सा रहे। इस रिसर्च को औंको जीन नामक प्रतिष्ठित जरनल में पब्लिशर नेचर स्प्रिंग की ओर से प्रकाशित किया गया है। डॉ. मुनीश ने बताया कि कैंसर की बीमारी से शरीर में ट्यूमर बन जाते हैं।

कीमोथेरेपी और दवाओं के जरिये इन ट्यूमर्स को खत्म किया जाता है। इलाज की इस प्रक्रिया में कैंसर सेल्स के साथ सामान्य सेल्स को भी नुकसान होता है। शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मरीज को भी काफी पीड़ा होती है। वैज्ञानिकों की टीम ने रिसर्च में पाया कि माइक्रो आरएनए यानी एमआईआर-21 नार्मल सेल्स को खत्म करता है। इससे कैंसर सेल्स और प्रभावशाली हो जाती हैं।

टीम ने चूहों पर प्रयोग करते हुए एमआईआर-21 को प्रभावहीन बनाने के लिए उसका एंटी सेंस चूहे में इंजेक्ट कर दिया और पाया कि चूहे के शरीर में बना ट्यूमर धीमे-धीमे छोटा हो गया और कुछ ट्यूमर पूरी तरह से खत्म हो गए। यह प्रयोग साल भर तक अमेरिका के क्लेवलैंड क्नीनिक में चला। हालांकि अभी मानव शरीर पर इसका प्रयोग नहीं हुआ है। इसे व्यवहारिक रूप से लागू करने में तकरीबन दस वर्ष का समय लग सकता है।

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ईरान ने ही मार गिराया था यूक्रेन का प्लेन

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नई दिल्ली। यूक्रेन का विमान जिसमें 176 लोग सवार थे उसे ईरान ने ही मार गिराया था। इराक में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल अटैक के कुछ घंटे बाद बुधवार को एक बोइंग प्लेन ईरान में क्रैश कर गया था।

अब ईरान ने क्रैश को लेकर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। विमान में सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। एक ईरानी जनरल ने कहा है कि गलती से यूक्रेन के विमान को मार गिराया गया था।

इस विमान में 176 लोग सवार थे। ईरान ने इसे ‘मानवीय भूल’ कहा है। एक ईरानी जनरल ने कहा है कि गलती से यूक्रेन के विमान को मार गिराया गया था। इस विमान में 176 लोग सवार थे। ईरान ने इसे ‘मानवीय भूल’ कहा है।

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