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सत्यपथ हस्ताक्षर इंडिया ने आयोजित किया सम्‍मान समारोह

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सत्यपथ हस्ताक्षर इंडिया 2016, सम्‍मान समारोह, जय शंकर प्रसाद सभागार

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लखनऊ। सत्यपथ हस्ताक्षर इंडिया 2016 सम्मान का आयोजन जय शंकर प्रसाद सभागार में किया गया। आयोजन का उद्देश्य उन लोगो को सम्मानित करना था जो अपने फन में माहिर है। सम्मानित लोगो में फ़िल्म और रंगगमंच में नए प्रयोग के लिए प्रसिद्ध रंजीत कपूर थे जिन्होंने हल्ला बोल, बैंडिट, जाने भी दो यारो, लज्जा जैसी तमाम फिल्में लिखीं वहीं हरीश कपूर को समाज सेवा में योगदान के लिये सम्मानित किया गया।

साहित्य जगत में लखनऊ का नाम रोशन कर रहे पंकज प्रसून को सम्‍मानित किया गया। 2 जनवरी 84 को रायबरेली के छोटे से गाँव लोहड़ा में जन्मे इस साहित्यकार ने अपनी चमक पूरे देश में बिखेरी है। पिछले दस वर्षों से देश की प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में व्यंग्य लेखन के साथ कई बड़े मंचों से व्यंग्यपाठ लगातार कर रहे हैं।

विज्ञान एवम् प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार ने छपवाया जो पूरे देश में निःशुल्क वितरित की जा रही है।इस उपलब्धि के लिए केंद्र सरकार उनको समानित कर कर चुकी है। डालीगंज की तंग गलियों में रहने वाले कलाकार अंसरुदीन ने शहर की कई प्रमुख इमारतों को संवारने का काम किया है, जिसमे हाल ही मे लमार्टिनियर कालेज ब्वॉज की दो सौ साल पुरानी इमारत की डिज़ाइन जो बिल्कुल जर्जर हो चुकी थी उस अपनी टीम के साथ दिन रात की मेहनत से सजा संवार रहे है।

उनके रेस्टोरेशन वर्क के लिए फ़्रांस सरकार उन्हें सम्मानित करने की घोषणा कर चुकी है। है। संस्था ने अंसरुद्दीन को हस्ताक्षर इंडिया सम्मान प्रदान किया। आईपीएस राजेश पान्डेय , इंस्‍पेक्‍टर सत्या सिंह, अशोक वर्मा सीओ हज़रतगंज एवं उनकी टीम साइबर सेल, विक्रमजीत सिंह रूपराय ( फोटोग्राफी), तूलिका बनर्जी (आरजे  आकाशवाणी) एसएसपी लखनऊ मंजिल सैनी (विशेषपुरस्कार हस्ताक्षर इंडिया) को सम्‍मानित किया गया

सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि सेवानिवृत आईपीएस एनके श्रीवास्तव, वरिष्‍ठ पत्रकार चंद्रसेन वर्मा, नवलकान्त सिन्हा, शलभ मणि त्रिपाठी सहित बड़ी संख्‍या में शहर के संभ्रांत लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफलता पूर्वक आयोजन संस्‍था के संस्थापक मुकेश वर्मा, संयोजक नीरज मिश्रा, संरक्षक संजय गुप्ता द्वारा किया गया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

आध्यात्म

हनुमान जयंती : कीजिए श्री हनुमान चालीसा का पाठ कट जाएगा हर संकट

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दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई :

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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