इस दिवाली जरुर करें उल्लू के दर्शन, बन जाएंगे मालामाल

दिवाली आने में महज आठ दिन बाकी है ऐसे में सभी ने अभी से दीवाली की तैयारियां करना जोरों-शोरों से शुरू कर दी है। लेकिन इन तैयारियों के बीच में आज हम आपको एक और ऐसी जरुरी खबर सुनाने जा रहे है जिसे दिवाली से पहले अपनाना आपके लिए बेहद ही फायदेमंद साबित हो सकता है।

दरअसल, इनदिनों साल भर बेवकूफी का सिम्बल बना रहने वाला उल्लू अत्यंत ही बेशकीमती हो गया है। लक्ष्मी जी की इस सवारी को लोग मुंहमांगे दामों में खरीदने को बेताब हो रहे हैं। सोर्सेज की मानें तो इस दीवाली उल्लू के लिए लोग 22-25 लाख देने को तैयार हैं।

उल्लू की इस डिमांड के पीछे रीजन यह कि दीवाली में इसका दर्शन होना काफी शुभ माना जाता है।

जिस तरह से दशहरे में नीलकंठ का दर्शन शुभ माना जाता है, उसी तरह दीवाली में उल्लू का दिखना बहुत लकी समझा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसके दर्शन मात्र से मनोकामना पूरी हो जाती है। गुडलक, वेल्थ और विज्डम के लिए उल्लू की बलि भी दी जाती है। तांत्रिक अपनी पूजा के दौरान उल्लू के स्कल्स, बोन्स, ब्लड, क्लॉज, लीवर, किडनी सहित अन्य बॉडी पार्ट्स का यूज करते हैं।

अमावस्या की रात तंत्र साधना के लिए उल्लुओं के बॉडी पार्ट्स का यूज किया जाता है। इसके लिए खास तरह के उल्लुओं की डिमांड होती है। उल्लुओं की 30 से अधिक प्रजातियों में करीब 15 प्रजाति के उल्लू जंगलों में नजर आते हैं। गांवों, खेतों और खलिहान में भी उल्लू देखने को मिलते हैं, लेकिन अब इनकी तादाद बेहद कम हो गई है।

नेपाल की तराई से लेकर लोकल जंगल में इनको तलाशने वालों को 10 हजार से अधिक का मेहनताना दिया जाता है।बिचौलिये उल्लुओं को मार्केट में ले जाकर लाखों में बेचते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार उल्लू के लिए 22 से 25 लाख तक की पेशकश की गई है।

वैसे, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत उल्लुओं के शिकार पर रोक है। बावजूद इसके चोरी- छिपे उल्लुओं का शिकार किया जाता है।

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