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आध्यात्म

लखनऊ में मिली केदारनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी, आरोपी ने डायल 112 पर कर दी धमकी

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में केदारनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। पुलिस कंट्रोल रुम में फोन कर केदारनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी देने का मामला सामने आया है। दिसंबर माह में यह धमकी दी गई थी। 20 दिन बीतने के बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने में इस मामले की एफआइआर दर्ज कराई गई है।

डायल 112 में आपरेशन कमांडर सुभाष कुमार के मुताबिक 22 दिसंबर को अंजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने केदारनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी दी। छानबीन में पता चला कि फोन राज ध्रुव सिंह नाम के युवक ने किया था। पड़ताल के बाद पुलिस को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। माना जा रहा है कि पुलिस आरोपित को गिरफ्तार कर सकती है।

लखनऊ पुलिस ने मामले की जानकारी उत्तराखंड पुलिस को दे दी है। यही नहीं फोन करने वाले आरोपित का ब्योरा भी साझा किया है। शुरूआती पड़ताल में आरोपित की लोकेशन पहले लखनऊ और फिर हरिद्धार में मिली। उत्तराखंड पुलिस भी आरोपित के बारे में पता लगा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार कर पूछताछ की जाएगी।

आध्यात्म

आज पूरा देश मना रहा रामनवमी, जानिए इसके पीछे की पूरी पौराणिक कहानी

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नई दिल्ली। आज पूरे देश में रामनवमी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन भगवान राम का जन्म हुआ था। जो विष्णु का सातवां अवतार थे। रामनवमी का त्यौहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। आइये जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कहानी।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान राम ने भी मां दुर्गा की पूजा की थी, जिससे कि उन्हें युद्ध के समय विजय मिली थी। साथ ही माना जाता है इस दिन गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस की रचना का आरंभ किया। राम नवमी का व्रत जो भी करता है वह व्यक्ति पापों से मुक्त होता है और साथ ही उसे शुभ फल प्रदान होता है

रामनवमी का इतिहास-

महाकाव्य रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थी। कौशल्या, सुमित्रा और कैकयी। शादी को काफी समय बीत जाने के बाद भी राजा दशरथ के घर किसी बालक की किलकारी नहीं गूंजी थी। इसके उपचार के लिए ऋषि वशिष्ट ने राजा दशरथ से पुत्र प्राप्ति के लिए कमेश्टी यज्ञ कराने के लिए कहा। जिसे सुनकर दशरथ खुश हो गए और उन्होंने महर्षि रुशया शरुंगा से यज्ञ करने की विन्नती की। महर्षि ने दशरथ की विन्नती स्वीकार कर ली। यज्ञ के दौरान महर्षि ने तीनों रानियों को प्रसाद के रूप में खाने के लिए खीर दी। इसके कुछ दिनों बाद ही तीनों रानियां गर्भवती हो गईं।

नौ माह बाद चैत्र मास में राजा दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया, कैकयी ने भरत को और सुमित्रा ने दो जुड़वा बच्चे लक्ष्मण और शत्रुघन को जन्म दिया। भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में धरती पर जन्म इसलिए लिया ताकि वे दुष्ट प्राणियों का नरसंहार कर सके।

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