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अन्तर्राष्ट्रीय

टहलने के दौरान महिला बनी करोड़पति, हाथ लगा ‘खजाना’

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नई दिल्ली। थाईलैंड की रहने वाली एक महिला समुद्र के किराने टहलने के दौरान अचानक से करोड़पति बन गई। चौंक गए न? दरअसल, जब वो अपने घर के नजदीक बीच पर वॉक कर रही थी तो उस दौरान उसके पैर से एक पत्थर का टुकड़ा टकराया।

जब महिला ने उस टुकड़े उठाया तो देखा कि वह व्हेल की उल्टी है। इस उल्टी की कीमत 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है। व्हेल की उल्टी से करोड़पति बनी महिला का नाम सिरीपॉर्न निमरीन है। निमरीन का घर सुमुद्र के किनारे पर बना हुआ है।

वह अक्सर अपने घर के बाहर बीच पर टहला करती थी। निमरीन ने बताया कि उसे जब करीब दो करोड़ का खजाना मिला था तब उसे भी भरोसा नहीं हुआ था। बता दें कि पहली नजर में वेल की उल्टी को पहचान सकना मुश्किल होता है।

ये एक चट्टान की तरह से नजर आती है। हालांकि इसकी कीमत बेहद ज्यादा होती है जिसकी वजह से इसे तैरता सोना कहा जाता है। दुनिया के कई हिस्सों में इसकी तस्करी भी की जाती है। भारत में भी वेल की उल्टी की कीमत करोड़ों में है।

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दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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