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खुशबू सुंदर ने कांग्रेस से तोड़ा नाता, बीजेपी में हो सकती हैं शामिल, जानें कौन हैं ये

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चेन्नई। तमिलनाडु में एक्ट्रेस से नेता बनीं खुशबू सुंदर ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे अपने पत्र में खुशबू सुंदर ने कहा, “कांग्रेस पार्टी में कुछ लोग ऊपर लेवल पर बैठे हैं, जिनका जमीनी हकीकत या लोगों से कोई जुड़ाव नहीं है। वही नियम बना रहे हैं। खुशबू ने 2014 में डीएमके छोड़ उसकी गठबंधन पार्टी कांग्रेस का हाथ थामा था।

बता दें कि खुशबू सुंदर ने हिंदी फिल्म द बर्निंग ट्रेन से बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया था। इसके अलावा भी खुशबु ने कई हिंदी फिल्मों में काम किया। उन्होंने मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया है। उन्होंने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण में उनके फैंस ने उन्हें एक मंदिर समर्पित किया है।

हालांकि 2014 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने के बाद से उनका राजनीतिक करियर का ग्राफ कुछ खास नहीं रहा है। यह तो साफ है कि बीजेपी तमिलनाडु में होने वाले 2021 के विधानसभा चुनावों के लिए चेहरा ढूंढ रही है। अभी भी पार्टी में कोई ऐसा बड़ा चेहरा नहीं है जो कि बीजेपी कि छवि को राज्य में बदल सकें।

आध्यात्म

Navratri 2020 : नवरात्र में कुट्टू का आटा देगा भरपूर न्यूट्रीशन

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नवरात्र तन, मन और आत्मा को स्वच्छ करने का मौका होता है। इस दौरान गेहूं का आटा नहीं, कुट्टू का आटा खाया जाता है। कुट्टू का आटा अनाज नहीं, बल्कि फल से बनता है और अनाज का बेहतर विकल्प होने के साथ पौष्टिक तत्वों भरपूर भी होता है।

कुट्टू के आटे के फायदों के बारे में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और जिन्हें गेहूं से एलर्जी हो, उनके लिए बेहतरीन विकल्प है। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।

चूंकि कुट्टू के आटे को चबाना आसान नहीं होता, इसलिए इसे छह घंटे पहले भिगो कर रखा जाता है, फिर इन्हें नर्म बनाने के लिए पकाया जाता है, ताकि आसानी से पच सके। चूंकि इसमे ग्लूटन नहीं होता इसलिए इसे बांधने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है।

यह ध्यान रखें कि इसकी पूरियां बनाने के लिए हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति का प्रयोग न करें, क्यूंकि यह इसके मेडिकल तत्वों को खत्म कर देता है। इसे बनी पूरियां ज्यादा कुरकुरी होती हैं। वैसे पूरी और पकोड़े तलने की बजाय इससे बनी रोटी खाएं। कुट्टू के आटे से इडली भी बन सकती है और समक के चावल से डोसा भी बनाया जा सकता है।

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कुट्टू के आटे के फायदे :

  • फाइबर से भरपूर और ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होने से यह डायब्टीज वालों के लिए बेहतर विकल्प है। कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है।
  • कुट्टू के आटे में मौजूद चाईरो-इनोसिटोल की पहचान डायब्टीज रोकने वाले तत्व के रूप में की गई है।
  • कुट्टू के आटे में मिलावट की जा सकती है और इसे विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदना चाहिए। पिछले साल का बचा हुआ आटा भी प्रयोग नहीं करना चाहिए, इससे फूड-प्वॉयजनिंग हो सकती है।
  • कुट्टू 75 प्रतिशत जटिल काबोहाइड्रेट है और 25 प्रतिशत हाई क्वालिटी प्रोटीन, वजन कम करने में यह बेहतरीन मदद करता है। इसमें अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है, जो एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है।
  • यह अघुलनशील फायबर का अच्छा स्रोत है और गॉलब्लैडर में पत्थरी होने से बचाता है। अमेरिकन जरनल ऑफ गेस्ट्रोएनट्रोलॉजी के मुताबिक, 5 प्रतिशत ज्यादा घुलनशील फायबर लेने से गाल ब्लैडर की पत्थरी होने का खतरा 10 प्रतिशत कम हो जाता है।

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