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आरिफ मोहम्मद खान ने केरल के राज्यपाल के रूप में ली शपथ

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नई दिल्ली। राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को केरल के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी मौजूद रहे।

आरिफ मोहम्मद खान गुरुवार को तिरुवनंतपुरम पहुंचे थे। आपको बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा हाल ही में उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

राजनीतिक करियर

आरिफ मोहम्मद खान ने 1972-73 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव से अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत की थी। 1972-73 में उन्हे एएमयू का अध्यक्ष चुना गया था।

हालांकि इससे पहले 1971-72 में वह विधानसभा चुनाव लड़ चुके थे जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 1977 में वह फिर जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुन लिए गए और राज्य सरकार में मंत्री बने। लेकिन जल्द ही लखनऊ में हुए शिया-सुन्नी दंगों से आहत होकर मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया।

आरिफ मोहम्मद खान तब महज 26 साल के थे। बाद में वो कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और 1980 के लोकसभा चुनाव में जीतकर इंदिरा सरकार में उप मंत्री बने।

1984 में बहराइच से लोकसभा के लिए चुने गए और राजीव सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन 1986 में शाहबानो मामले में राजीव गांधी से मतभेद के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देकर बाद में विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ कांग्रेस छोड़ दी।

1989 के लोकसभा चुनाव में जनता दल के टिकट से चुनाव जीतकर वो केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री व उर्जा मंत्री बने। बाद जनता दल छोड़कर उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ले ली।

1998 में बहराइच से लोकसभा का चुनाव लड़े, जीत गए। 2004 में आरिफ मोहम्मद खान फिर भाजपा में शामिल हो गए और कैसरगंज से लोकसभा का चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 2007 में भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति को भी अलविदा कह दिया।

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यूपी में कोरोनाः पुलिस ने लोगों से की इकठ्ठा न होने की अपील, भीड़ ने कर दिया हमला

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नई दिल्ली। जिले के थाना भोपा अंतर्गत गांव मोरना में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने पहुंची पुलिस को भीड़ ने लहूलुहान कर दिया। गांव वालों की भीड़ द्वारा किए गए हमले में चौकी इंचार्ज मोरना सब-इंस्पेक्टर लेखराज सिंह सहित दो सिपाही बुरी तरह जख्मी हो गए।

चौकी इंचार्ज की गंभीर हालत के चलते उन्हें तत्काल इलाज के लिए अब से कुछ देर पहले ही मेरठ रेफर कर दिया गया है। इस सिलसिले में पुलिस ने मोरना गांव के पूर्व प्रधान और उसकी दो पुत्रवधुओं को गिरफ्तार कर लिया है।

देर रात आईएएनएस से फोन पर बात करते हुए घटना की पुष्टि जिला पुलिस प्रवक्ता सतेंद्र सिंह ने की। घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव सहित तमाम आला पुलिस अफसर घटनास्थल पर पहुंच गए। घटनाक्रम के मुताबिक, “शाम करीब 6 बजे चौकी इंचार्ज मोरना सब-इंस्पेक्टर लेखराज सिंह और दो सिपाही रवि कुमार व एक अन्य सिपाही के साथ इलाके में घूम रहे थे। उसी वक्त पुलिस वालों ने मोरना गांव में करहेड़ मोड़ पर मौजूद भीड़ देखी।”

मुजफ्फरनगर जिला पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, “गांव वालों की भीड़ गांव के पूर्व प्रधान नाहर सिंह के घर के बाहर इकट्ठी थी। पुलिस टीम ने नाहर सिंह और भीड़ में मौजूद लोगों से लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की बात कही। इस पर भीड़ पुलिस वालों के ऊपर टूट पड़ी। भीड़ गांव की कई महिलाएं भी आकर शामिल हो गईं। भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे, लोहे सरिया इत्यादि थे। भीड़ ने पुलिस टीम को घेरकर सुनियोजित तरीके से हमला किया था। इसलिए पुलिसकर्मी खुद का बचाव भी नहीं कर पाए।”

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक (देहात) नेपाल सिंह, व भोपा के क्षेत्राधिकारी (सीओ) राम मोहन शर्मा भी मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल लेकर पहुंच गए। अधिकारियों ने मौके पर बेहोश पड़े पुलिस कर्मियों को तुरंत पास के ही सरकारी अस्पताल में दाखिल कराया। बुधवार देर रात सब-इंस्पेक्टर (मोरना चौकी इंचार्ज) लेखराज सिंह की हालत गंभीर होने पर उन्हें मेरठ रेफर कर दिया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव के मुताबिक, “फिलहाल हमलावरों में तीन लोग गिरफ्तार कर लिए गए हैं। गिरफ्तार लोगों में गांव मोरना का ही पूर्व ग्राम प्रधान नाहर सिंह व उसके दोनो बेटों की बहुएं शामिल हैं। बाकी लोग मौके से भागने में कामयाब हो गए। उनकी तलाश में पुलिस टीमें निकली हुई हैं।”

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