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ऑफ़बीट

मेसी की तरह फुटबॉल खेलती है ये गाय, गेंद छीनने में खिलाड़ियों के छूटे पसीने, देखें वीडियो

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो एक गाय का है जो किसी प्रोफेशनल फुटबाल खिलाड़ी की तरह विपक्षी टीम से बॉल को बचा रही है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय फील्ड में खड़ी है और फुटबॉल को किस तरह उसने अपने कब्जे में कर रखा है। कोई भी खिलाड़ी उससे गेंद नहीं छीन पा रहा है।

फिर थोड़ी देर बाद गाय गेंद को किसी फुटबॉल खिलाड़ी की तरह पैरों से धीरे-धीरे आगे बढ़ाती है। तभी एक लड़का हिम्मत दिखाकर उससे गेंद छीनने की कोशिश करता है लेकिन गाय के हुंकार से वो तुरंत वहां से भाग जाता है।

इसके बाद किसी तरह कुछ लड़के गाय से गेंद लेते हैं लेकिन उसके बाद भी गाय गेंद का पीछा नहीं छोड़ती और उसे लेकर ही दम लेती है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ इस वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं। वीडियो को देखकर लोग गाय के फुटबॉल प्रेम पर आश्चर्य जता रहे हैं।

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मंगल पांडे को फांसी देने से जल्लाद ने कर दिया था इनकार, फिर अंग्रेजों ने किया ये काम

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नई दिल्ली। भारत को आजादी की बात करने पर सबसे पहले मंगल पांडे का नाम दिमाग में आता है। मंगल पांडे भारत को आजादी दिलाने के लिए अपनी जान देने वाले पहले भारतीय थे।

उनके द्वारा भड़काई गई क्रांति की ज्वाला से अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन बुरी तरह हिल गया था। आज उनकी 192वीं जयंती है। उनका जन्म आज ही के रोज  जन्‍म 1827 में 19 जुलाई को हुआ था।

अपनी हिम्मत और हौसले के दम पर समूची अंग्रेजी हुकूमत के सामने मंगल पांडे की शहादत ने भारत में पहली क्रांति के बीज बोए थे।

उनका जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम  दिवाकर पांडे और मां का नाम श्रीमती अभय रानी था।

वे कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” की पैदल सेना के 1446 नंबर के सिपाही थे। भारत की आजादी की पहली लड़ाई अर्थात् 1857 के संग्राम की शुरुआत उन्हीं के विद्रोह से हुई थी।

18 अप्रैल, 1857 का दिन मंगल पांडे की फांसी के लिए निश्चित किया गया था। आपको बता दें, बैरकपुर के जल्लादों ने मंगल पांडे के खून से अपने हाथ रंगने से इनकार कर दिया।

तब कलकत्ता (कोलकाता) से चार जल्लाद बुलाए गए। 8 अप्रैल, 1857 के सूर्य ने उदित होकर मंगल पांडे के बलिदान का समाचार संसार में प्रसारित कर दिया।

 

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