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शपथ ग्रहण से पहले अरुण जेटली ने की पीएम मोदी से अपील, कहा- न करें मंत्रिमंडल में शामिल

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नई दिल्ली। पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें नए मंत्रिमंडल में शामिल न करने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने कहा, “पिछले 18 महीनों से, मुझे कुछ गंभीर बीमारियां रही हैं। डॉक्टरों की मदद से मैं ज्यादातर बीमारियों से ठीक हो गया।”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने कहा कि मोदी के केदारनाथ जाने से पहले ही वह मोदी से यह आग्रह कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “मैं यह निवेदन करने के लिए आपको औपचारिक रूप से पत्र लिख रहा हूं कि मुझे खुद को, अपने इलाज और अपने स्वास्थ्य को उचित समय देना चाहिए और इसलिए फिलहाल नई सरकार में मुझे कोई जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए।”

जेटली ने कहा है कि यद्यपि लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान वह उन्हें दी गईं जिम्मेदारियों के निर्वहन में सक्षम थे लेकिन “मैं भविष्य में कुछ समय तक किसी भी जिम्मेदारी से दूर रहना चाहता हूं। इससे मैं अपने इलाज और स्वास्थ्य पर ध्यान दे पाऊंगा।”

उन्होंने कहा, “सरकार या पार्टी द्वारा दी गई किसी भी जिम्मेदारी को अनौपचारिक रूप से निपटाने के लिए मेरे पास पर्याप्त समय होगा।”

इनपुट आईएएनएस

 

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रेलवे में ख़त्म होगा खलासी सिस्टम, नहीं होंगी नई भर्तियां

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना संजोए हुए हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। दरअसल रेलवे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करने वाले ‘बंगला पियुन’ या खलासियों की नियुक्ति की औपनिवेशिक काल की प्रणाली को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है और इस पद पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी किया।

रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी (TADK) संबंधी मामले की समीक्षा की जा रही है. आदेश में कहा गया है, ‘टीएडीके की नियुक्ति संबंधी मामला रेलवे बोर्ड में समीक्षाधीन है इसलिए यह फैसला किया गया है कि टीएडीके के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और न ही तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, एक जुलाई 2020 से इस प्रकार की नियुक्तियों को दी गई मंजूरी के मामलों की समीक्षा की जा सकती है और इसकी स्थिति बोर्ड को बताई जाएगी। इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए।

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