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लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस की बैठक शुरू, हो सकते हैं बड़े बदलाव

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में मंथन का दौर शुरू हो गया है। चुनाव में हार के बाद आज यानि शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति (cwc) की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का पहुंचना शुरू हो गया है।

बैठक में हिस्सा लेने सबसे पहले आरपीएन सिंह, पीएल पुनिया और मोतीलाल वोरा पहुंचे। उसके बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, पी चिदंबरम, सिद्धारमैया और कैप्टन अमरिंदर सिंह भी कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे।

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक सीटें हासिल नहीं हो सकी। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को उम्मीद थी कि वो पिछली बार से अच्छा प्रदर्शन करगे लेकिन ऐसा न हो सका। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के बड़े नेताओं के हार के बाद पार्टी में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं। इस बीच, यूपी में अब तक के सबसे बुरे प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने इस्तीफे की पेशकश की है।

राज बब्बर का हटना तय माना जा रहा है। वहीं, ओडिशा अध्यक्ष निरंजन पटनायक और कर्नाटक चुनाव प्रभारी एसके पाटिल ने भी इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक राहुल ने अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कुछ वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की लेकिन सभी ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी है।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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