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‘पाकिस्तान पर फिर हमला करने जा रहा है भारत, हमारे पास है विश्वसनीय जानकारी’

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर भारतीय वायुसेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक से जैश-ए-मोहम्मद के 13 ठिकाने पूरी तरह से बर्बाद हो गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायुसेना की इस कार्रवाई में कई आतंकवादी मारे गए थे। भारत की एयर स्ट्राइक के बाद आलम ये है कि पाकिस्तान को अभी भी अपने ऊपर हमला होने का डर सता रहा है।

पाकिस्तान ने कहा है कि उसके पास ‘विश्वसनीय जानकारी’ है कि भारत इसी महीने एक बार फिर उस पर हमला करने वाला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मुल्तान में पत्रकारों से कहा- ‘हमारे पास विश्वसनीय जानकारी है कि भारत पाकिस्तान पर नया हमला करने की रणनीति बना रहा है। हमारी जानकारी के मुताबिक, 16 से 20 अप्रैल के बीच ये हो सकता है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यह भी कहा है कि यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल के पांच स्थायी सदस्यों से पाकिस्तान अपनी चिंता जाहिर कर चुका है। भारत के हमला करने की बात कहते हुए कुरैशी ने कोई सबूत का जिक्र नहीं किया।

हालांकि कुरैशी ने यह नहीं बताया कि उन्हें हमले की तारीख कैसे पता चली। उन्होंने कहा कि पीएम इमरान खान ने ये जानकारी देश के साथ बांटने पर सहमति जताई है। पाकिस्तान के इस दावे पर अब तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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