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बालाकोट के मदरसे के छात्र ने खोली पाकिस्तान की पोल, बताया उस दिन 3.30 बजे कैसे खत्म हुए आतंकी!

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नई दिल्ली। 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद से पुलवामा हमले का बदला ले लिया। भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक करते हुए जैश द्वारा संचालित मदरसे को अपना निशाना बनाया और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया।

हमले से ठीक पहले बुरी तरह से डरे पाकिस्तानी सेना ने मदरसे को खाली करवाया और छात्रों को कुछ दिनों के लिए सुरक्षित जगह पर भेज दिया।

हाल ही में, अंग्रेजी अखबार दि इंडियन एक्सप्रेस ने बालाकोट के तालीम-उल-कुरान मदरसे के छात्रो से बात की जिसके बात इस पूरी घटना से जुड़ी एक अलग ही सच्चाई सामने आई।

छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ एयर स्ट्राइक से एक हफ्ते पहले ही पाकिस्तानी सेना जैश के ठिकानों को सुरक्षा दे रही थी। छात्र ने बताया कि 26 फरवरी की सुबह जब  वे सो रहे थे तब उसे और कुछ अन्य लोगों को धमाके की आवाज सुनाई दी। धमाके से घबराकर छात्र उठे लेकिन फिर उसे वहम या भूकंप समझकर वापस सो गए थे।

सुबह की पहली नमाज के वक्त जब वे दोबारा उठे तो पाकिस्तानी सेना ने वहां के लोगों से जगह खाली करने को कहा। फिर सेना उन लोगों को कहीं और ले गई जहां उन्हें दो-तीन दिन के लिए रखा गया।

छात्र ने बताया कि मदरसे में उस वक्त काफी लोग थे लेकिन सभी को सुरक्षित स्थानों पर नहीं ले जाया गया। सिर्फ उसे और उसकी उम्र के कुछ लोगों को वहां से ले जाया गया, इसलिए उसे पता नहीं चल पाया कि और लोगों के साथ क्या हुआ और धमाका आखिर कहां हुआ था।

पाकिस्तानी सेना के जैश के ठिकानों को सुरक्षित करने से कही न कही ये साबित होता है कि 14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए हमले में जैश-ए -मोहम्मद के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना का भी हाथ था।

रिपोर्ट-मानसी शुक्ला 

 

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भारतीय वैज्ञानिकों ने रचा इतिहास, चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाया

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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने मंगलवार को चंद्रयान-2 को चांद की पहली कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश करा कर इतिहास रच दिया है।

चांद के ऑर्बिट में चंद्रयान-2 को प्रवेश कराना वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती चंद्रयान-2 की गति कम करने की थी जिसे इसरो वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक 10.98 किमी प्रति सेकेंड से 1.98 किमी प्रति सेकेंड कर दिया।

वैज्ञानिकों ने सुबह 8.30 से 9.30 बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की कक्षा LBN#1 में प्रवेश कराया। अब चंद्रयान-2, 118 किमी की एपोजी (चांद से कम दूरी) और 18078 किमी की पेरीजी (चांद से ज्यादा दूरी) वाली अंडाकार कक्षा में अगले 24 घंटे तक चक्कर लगाएगा।

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 की गति 90 फीसदी इसलिए कम की गई है ताकि यान चांद गुरूत्वाकर्षण की वजह से उसके सतह से टकरा न जाए। पहले ऑर्बिट में प्रवेश के बाद 7 सितंबर को चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट बाहुबली के जरिए प्र‍क्षेपित किया गया था।

इससे पहले 14 अगस्त को चंद्रयान-2 को ट्रांस लूनर ऑर्बिट में डाला गया था. उम्मीद जताई जा रही है कि 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग को लाइव देखेंगे।

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