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नेशनल

पब्लिक प्लेस पर खड़ी चार खूबसूरत महिलाओं हुई जेल, पुलिस ने घर से की गिरफ्तारी

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सोमवार को दिल्ली के रोहिणी इलाके के सेक्टर 20 से पुलिस ने चार महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इन महिलाओं पर अश्लील हरकतें करने के आरोप लगा हैं। पुलिस के मुताबिक – ये महिलाएं पुरुषों को गंदे इशारे कर बुलाती हैं, जिससे वहां रहने वाले लोगों को दिक्कत होती है।

पुलिस ने बताया कि ‘उन्हें सोमवार शाम करीब 7 बजे शिकायत का फोन आया। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ये लोग सेक्स रैकेट चला रहे हैं।’

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एक पुलिस अधिकारी के अनुसार ये महिलाएं पुरुषों को गंदे इशारे कर के बुलाती हैं, जिससे वहां रह रहे लोगों को परेशानी होती है। पुलिस ने इन महिलाओं को घर से गिरफ्तार किया, जहां ये किराये पर रही थीं।

अधिकारी ने आगे कहा, ‘इस केस में अभी तक सेक्स रैकेट का पता नहीं चला है, लेकिन इन महिलाओं के खिलाफ सार्वजनिक जगहों पर अश्लील हरकतें करने के मामले में केस दर्ज कर लिया गया है।’

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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