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अन्तर्राष्ट्रीय

कोरियाई देशों के बीच टला जंग का खतरा, बनी सहमति

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सियोल। दक्षिण कोरिया और डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) के बीच पिछले कुछ सप्ताह से जारी तनाव समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच मंगलवार सुबह समझौता हो गया। बारूदी सुरंग विस्फोट और दुष्प्रचार के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने फोन के जरिए बताया कि दोनों कोरियाई देशों के मुख्य सैन्य सहयोगियों के बीच शीर्ष स्तर की वार्ता के दौरान बनी सहमति के मुताबिक मंगलवार दोपहर तक दक्षिण कोरिया ने सीमावर्ती क्षेत्रों से अपने सभी प्रोपेगैंडा प्रसारण (लाउडस्पीकर के जरिए प्रचार) को बंद कर दिया। इसके बदले, डीपीआरके ने भी मंगलवार दोपहर तक अपनी सैन्य टुकड़ियों को सीमा से पीछे हटा लिया।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता किम मिन-सिओक ने मंगलवार सुबह संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दक्षिण कोरिया की सेना उचित कदम उठाएगी और डीपीआरक सेनाओं के कदम पर करीबी नजर रखेगी। प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिण कोरिया मंगलवार दोपहर से फ्रंटलाइन क्षेत्रों से प्रोपेगैंडा ब्रॉडकास्ट बंद कर देगा। डीपीआरके ने युद्ध की घोषणा के रूप में लाउडस्पीकर्स के जरिए दुष्प्रचार की निंदा की थी। किम ने कहा कि दक्षिण कोरिया की सैन्य टुकड़ियों को धीरे-धीरे पीछे हटाने से पहले उन्हें मंगलवार दोपहर अलर्ट पर रखा जाएगा। उत्तर कोरिया के गांव पनमोंजुम में 43 घंटे लंबी चली वार्ता के बाद दोनों कोरियाई देश मंगलवार तड़के समझौते पर राजी हो गए। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरियाई सीमा पर चार अगस्त को बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल दक्षिण कोरिया के दो सैनिकों के प्रति खेद व्यक्त किया है।

अन्तर्राष्ट्रीय

भारत में अवसरों की भरमार, पीएम मोदी के नेतृत्व में 10 सालों में देश ने अच्छी प्रगति की : वॉरेन बफे

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नई दिल्ली। बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन और सीईओ वॉरेन बफे भारत की निवेश की संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं। उन्होंने रविवार को कंपनी की सालाना बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत में अवसरों की भरमार हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। बीते दस सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने सभी आर्थिक मानदंडों में अच्छी प्रगति की है। अब लगभग 3.7 ट्रिलियन डॉलर (अनुमान वित्त वर्ष 2023-24) की जीडीपी के साथ भारत आर्थिक रूप से पांचवां सबसे बड़ा देश है। एक दशक पहले देश 1.9 ट्रिलियन डॉलर (मौजूदा बाजार मूल्य) की जीडीपी के साथ भारत 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस 10 साल की यात्रा में कई रिफॉर्म हुए जिसने देश को आर्थिक रूप से आगे बढ़ाया है।

रविवार को अपनी कंपनी की वार्षिक बैठक में वॉरेन बफेट ने कहा, भारत में नई संभावनाओं का पता लगाएं। यहां ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं जिनको सर्च नहीं किया गया है या यहां मौजूद अवसरों पर ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा, मुझे यकीन है कि भारत में बहुत सारे अवसर हैं। सवाल यह है कि क्या हमें उनके बारे में जानकारी है, जिसमें हम भाग लेना चाहेंगे। बफेट देश में संभावित प्रवेश की तलाश में हैं। भारत की जीडीपी ग्रोथ एक नए शिखर पर पहुंचने के लिए तैयार है। विनिर्माण और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों ने फिर से सुधार देखना शुरू कर दिया है और जीएसटी कलेक्शन नई ऊंचाई हासिल कर रहा है।

आरबीआई के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत की जीडीपी ग्रोथ महामारी से पहले 2020 के दौरान दर्ज की गई 7 प्रतिशत से ऊपर बढ़ने के संकेत हैं। आईएमएफ के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, 2004 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 635 डॉलर थी। 2024 में देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़कर 2,850 डॉलर हो गई है, जो इसके समकक्ष देशों के लिए 6,770 डॉलर का 42 प्रतिशत है। इस महीने की शुरुआत में जारी एचएसबीसी सर्वे के अनुसार, मजबूत मांग के कारण भारत का विनिर्माण सेक्टर अप्रैल में मजबूत गति से बढ़ा। इसके अलावा विश्व चुनौतियों के बावजूद, एक लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न के साथ देश ग्लोबल स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम बना हुआ है।

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