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अन्तर्राष्ट्रीय

आज नवाज शरीफ के लिए ‘कयामत’ का दिन

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नई दिल्ली। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ पनामा पेपर लीक मामले में शुक्रवार को फैसला सुना सकती है। कोर्ट की तरफ से गुरुवार को जारी की गई सप्लीमेंट्री कॉज लिस्ट के अनुसार पांच जजों की बेंच सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे इस मामले का फैसला सुनाएगी।

नवाज शरीफ और उनके परिवार पर प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए लंदन में प्रॉपर्टी बनाने के आरोप हैं और इसका खुलासा पिछले साल पनामा पेपर लीक में हुआ था। पनामा पेपर्स में बताया गया है कि नवाज की राजनीतिक उत्तराधिकारी और उनकी बेटी मरियम नवाज ने लंदन में लाखों डॉलर की प्रॉपर्टी बनाई है। साथ ही उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है।

नवाज के खिलाफ फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस एजाज हसन, जस्टिस एजाज अफजल, जस्टिस सईद शेख, जस्टिस आसिफ सईद खोसा और जस्टिस गुलजार अहमद शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक अगर नवाज शरीफ कुर्सी छोडऩी पड़ी, तो उनके छोटे भाई शहबाज शरीफ की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी तय है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अगर सुप्रीम कोर्ट संवेदनशील पनामा पेपर्स मामले में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अयोग्य ठहराता है, तो उनके छोटे भाई एवं पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शहबाज उनकी जगह ले सकते हैं।

अन्तर्राष्ट्रीय

कुवैत में संसद भंग, सभी कानून और संविधान के कुछ अनुच्छेद निलंबित

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नई दिल्ली। कुवैत के अमीर शेख मिशाल ने संसद को भंग कर दिया है। अमीर ने शुक्रवार को सरकारी टीवी पर एक संबोधन में इसकी घोषणा की। इसके अलावा अमीर ने देश के सभी कानूनों के साथ संविधान के कुछ अनुच्छेदों को चार साल तक के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। सरकारी टीवी के मुताबिक, इस दौरान नेशनल असेंबली की सभी शक्तियां अमीर और देश की कैबिनेट के पास होंगी।

एमीर ने सरकारी टीवी पर दिए अपने संबोधन में संसद भंग करने की घोषणा करते हुए कहा, “कुवैत हाल ही में बुरे वक्त से गुजर रहा है, जिसकी वजह से किंगडम को बचाने और देश के हितों को सुरक्षित करने के लिए कड़े फैसले लेने में झिझक या देरी करने के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में देश के कई डिपार्टमेंट्स में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। भ्रष्टाचार की वजह से देश का महौल खराब हो रहा है। अफसोस की बात ये है कि भ्रष्टाचार सुरक्षा और आर्थिक संस्थानों तक फैल गया है। साथ ही अमीर ने न्याय प्रणाली में भ्रष्टाचार होने की बात कही है।

कुवैत पिछले कुछ सालों से घरेलू राजनीतिक विवादों से घिरा रहा है। देश का वेल्फेयर सिस्टम इस संकट का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और इसने सरकार को कर्ज लेने से रोका है। इसकी वजह से अपने तेल भंडार से भारी मुनाफे के बावजूद सरकारी खजाने में पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बहुत कम पैसे बचे हैं। कुवैत में भी दूसरे अरब देशों की तरह शेख वाली राजशाही सिस्टम है लेकिन यहां की विधायिका पड़ोसी देशों से ज्यादा पावरफुल मानी जाती है।

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