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नेशनल

सियालदह एक्सप्रेस में बम की सूचना के बाद इटावा में तलाशी

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इटावा| सियालदाह से अजमेर जा रही अजमेर-सियालदाह सुपरफास्ट एक्सप्रेस में मंगलवार को बम और आतंकवादियों के होने की सूचना मिली, जिसके बाद देर रात 11.20 बजे ट्रेन को इटावा रेलवे स्टेशन पर अचानक रोककर लगभग एक घंटे तक तलाशी ली गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रेलवे प्रशासन को ट्रेन में बम और आंतकवादी होने की सूचना मिली थी। सियादह एक्सप्रेस के एक-एक डिब्बे में तलाशी अभियान चलाया गया। अंत में यह सूचना अफवाह निकली। तलाशी के दौरान लावारिस बोरी मिली, जिसमें कचरा था। इस अफवाह से यात्री बेहद डरे हुए नजर आए।

सियालदाह नियंत्रण कक्ष से आगरा अनुभाग जीआरपी नियंत्रण कक्ष में सूचना दी गई कि इस ट्रेन में पांच संदिग्ध आतंकवादी सवार हैं। इस सूचना पर जीआरपी के अलावा स्थानीय पुलिस को तुरंत स्टेशन भेजा गया। पुलिस और पीएसी ने पूरा स्टेशन घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। सीओ (सिटी) शिवराज सिंह ने बताया कि इटावा जंक्शन पर अजमेर-सियालदह एक्सप्रेस को रोकर कर तलाशी ली गई, जिसमें लावारिस सामान की सूचना मिली थी।  उन्होंने बताया कि राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी), रेलवे सुरक्षा बदल (आरपीएफ) और सिविल पुलिस ने जांच की, जिसमें एक लावारिस बोरी मिली। लेकिन इसमें कुछ भी संदिग्ध नहीं पाए जाने पर आरपीएफ ने इसे आगे की यात्रा के लिए रवाना कर दिया।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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