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27 सितंबर को UN में भाषण देंगे पीएम मोदी

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नई दिल्ली। 27 सितंतबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र (यूएन) जनरल असेंबली के वार्षिक उच्चस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करेंगे। न्यूयॉर्क में होने वाले इस सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी कई देशों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत भी करेंगे। जानकारी के मुताबतिक पीएम मोदी के संबोधन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का संबोधन होगा।

यूनाइटेन नेशंस जनरल असेंबली की सूची के मुताबिक 74वें सत्र की बहस के लिए पीएम मोदी 27 सितंबर की सुबह सत्र को संबोधित करेंगे। आपको बता दें कि पीएम मोदी ने पहली बार इस सभा को साल 2014 में संबोधित किया था। इस बार का ये संबोधन उनके दूसरे कार्यकाल का पहला होगा।

वहीं पीएम मोदी के संबोधन के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का संबोधन होगा. वक्ताओं की सूची बताती है कि 112 राज्य प्रमुख और 30 से अधिक देशों के विदेश मंत्री जनरल डिबेट को संबोधित करने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचेंगे।

जनरल डिबेट की शुरुआत 24 सितंबर को होगी जो 30 सितंबर तक जारी रहेगी। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 24 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे। उन्होंने साल 2017 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र की महासभा को संबोधित किया था। महासभा के संबोधन की शुरुआत ब्राजील से होगी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का संबोधन होगा।

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मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन बोले-बाबर ने बनवाया था मंदिर

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नई दिल्ली। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनावाई के 28वें दिन मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने अदालत में बाबरनामा का हवाला दिया।

राजीव ने कहा कि वहां मंदिर ही बाबर ने बनाया था। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे। लिहाजा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई।

राजीव धवन ने कहा कि जस्टिस अग्रवाल के इस विचार से भी इत्तेफाक नहीं रखता, जो कहीं रिपोर्ट को मान रहे हैं और कहीं नहीं। इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा कि कई पुरानी मस्जिदों में संस्कृत में भी कुछ लिखा हुआ मिला है। वो कैसे?

जज के सवाल का जवाब देते हुए राजीव धवन ने कहा कि क्योंकि बनाने वाले मजदूर कारीगर हिंदू होते थे तो वे अपने तरीके से इमारत बनाते थे।

बनाने का काम शुरू करने से पहले वो विश्वकर्मा और अन्य तरह की पूजा भी करते थे और काम पूरा होने के बाद यादगार के तौर पर कुछ लेख भी अंकित करते थे।

 

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