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67 साल पहले आंबेडकर के साथ लोगों ने किया था कुछ ऐसा, अंतिम समय तक भूल नहीं पाए थे

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नई दिल्ली। डॉ बी.आर आंबेडकर की 128 वीं जयंती आज पूरा देश मना रहा है। पीएम मोदी समते कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने रविवार को आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी।

उनकी जयंती पर आज हम बाबा साहेब आंबेडकर से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बताएंगे जो बहुत कम ही लोगों को पता होगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि संविधान को बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले आंबेडकर देश में हो रहे पहले लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। बात 67 साल पहले की है।

पहले बार हो रहे लोकसभा चुनाव में आंबेडकर को एनएस काजोलकर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। काजोलकर, आंबेडकर के पूर्व सहयोगी रहे थे। चुनाव में आंबेडकर को 1,23,576 वोट मिले और काजरोल्कर को 1,37,950 वोट मिले।

कहा जाता है कि इस सीट से चुनाव हारने का आंबेडकर को गहरा दुख हुआ क्योंकि महाराष्ट्र उनकी कर्मभूमि थी। चुनाव के बाद कांग्रेस ने कहा कि आंबेडकर सोशल पार्टी का साथ दे रहे थे इसलिए उनका विरोध करने के अलावा पार्टी के पास कोई दूसरा चारा नहीं था। बात यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि 1954 में हुए उपचुनाव में भी आबंडेकर को दोबारा हार का सामना करना पड़ा।

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चमकी बुखार से मौत का आंकड़ा बढ़ा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन बिहार पहुंचे

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पटना। बिहार के मुज्जफरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (चमकी बुखार) से मरने वालों की संख्या 83 हो गई है। अब तक इस जानलेवा बीमारी पर बिहार और केंद्र सरकार काबू नहीं पा सकी है।

रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन चमकी बुखार और लू से पीड़ित लोगों का हालचाल लेने के लिए पटना पहुंचे। यहां पहुंचकर गर्मी से हुई लोगों की मौत पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह बेहद दुखद है कि लोग गर्मी से मर रहे हैं।

मेरी सलाह है कि जबतक तापमान सामान्य नहीं हो जाता घर से बाहर न निकलें। तेज गर्मी दिमाग पर असर डालती है। इसके बाद हर्षवर्धन मुजफ्परपुर के लिए रवाना हो गए। वहीं उनके पटना पहुंचने पर जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पटना में डॉ. हर्षवर्धन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

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