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धारा 370 पर पलटे अमित शाह, कह दी ऐसी बात, जानकर रह जाएंगे दंग!

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नई दिल्ली। पुलवामा हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद के जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35 A को हटाने की मांग तेज हो गई है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है।

अमित शाह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोल सकते और न ही इस मुद्दे पर सरकार के रुख के बारे में उन्हें कोई जानकारी है।

आपको बता दें कि सरकार बनने से पहले भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में धारा 370 को हटाने की बात का जिक्र किया था लेकिन लगभग पांच साल बीत जाने के बावजूद इस मुद्दे पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

शाह ने एक समाचार चैनल पर जम्मू कश्मीर से 370 या 35 ए हटाए जाने के सवाल पर यह बात कही। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह तो सरकार का काम है। मैं संगठन का आदमी हूं, संगठन का काम करते हैं।

वहीं, बाबा रामदेव ने शाह के इस बयान पर उनका बचाव किया है। उन्होंने कहा कि जो संविधान के मूल के ही खिलाफ है, उसके प्रति देश में एक माहौल तो बने। लोग चर्चा तो शुरू करें, इसे मुद्दा तो बनाएं, बाकी रहा सहा काम सुप्रीम कोर्ट और मोदी जी कर देंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने वाली याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान से इंडिया शब्द हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के पास रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए और केंद्र को ज्ञापन दिया जा सकता है। मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम ये नहीं कर सकते क्योंकि पहले ही संविधान में भारत नाम ही कहा गया है।

यह याचिका नमह (Namah) नामक दिल्ली के किसान की ओर से कोर्ट में डाली गई थी और संविधान के आर्टिकल-1 में बदलाव की मांग की गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से ‘इंडिया’ को हटाकर ‘भारत’ नाम की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इंडिया नाम अंग्रेजों की गुलामी का प्रतीक है। देश का नाम अंग्रेजी में भी भारत करने से लोगों में राष्ट्रीय भावना बढ़ेगी और देश को अलग पहचान मिलेगी। याचिका दायर करने वाले नमह ने कहा कि प्राचीन काल में देश को भारत के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद अंग्रेजी में देश का नाम ‘इंडिया’ कर दिया गया इसलिए देश के असली नाम ‘भारत’ को ही मान्यता दी जानी चाहिए।

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