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राहुल गांधी ने ई-मेल दिखाकर पीएम मोदी पर लगाया सनसनीखेज आरोप, कहा-ये देशद्रोह…

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नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मुद्दे पर पीएम मोदी पर एक बार फिर निशाना साधा है। राहुल ने मंगलवार की सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी और अनिल अंबानी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि अनिल अंबानी को 10 दिन पहले डील से जुड़ी अहम जानकारियां कैसी थीं?

एक ईमेल का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ‘एयरबस कंपनी के एग्जक्यूटिव ने ईमेल में लिखा है कि फ्रांस के रक्षा मंत्री के ऑफिस में अनिल अंबानी गए थे। मीटिंग में अंबानी ने कहा था कि जब पीएम आएंगे तो एक एमओयू साइन होगा, जिसमें अनिल अंबानी का नाम होगा। यानी राफेल डील में।

इसके बारे में न तो भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री को मालूम था, न ही एचएएल को न ही विदेश मंत्री को। लेकिन राफेल डील से 10 दिन पहले अनिल अंबानी को इस डील के बारे में मालूम था। इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री अनिल अंबानी के मिडिलमैन की तरह काम कर रहे थे। सिर्फ इसी आधार पर टॉप सेक्रेट को किसी के साथ शेयर करने को लेकर प्रधानमंत्री पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। उन्हें जेल भेजना चाहिए। यह देशद्रोह का मामला है।’

उन्होंने राफेल डील को लेकर आगे कहा कि इस मुद्दे से तीन बातें जुड़ी हैं. ये हैं- करप्शन, प्रोसीजर और देशद्रोह. उन्होंने कहा कि इन तीन मामलों में कोई नहीं बचेगा।

Edited by: मानसी शुक्ला

 

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बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

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