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नेशनल

OMG : कांग्रेस को ये क्या बोल गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी? किया चुवानी जंग का ऐलान

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नरेंद्र मोदी

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस पर जमकर बरसे। इसी के साथ उन्होंने चुनावी जंग का ऐलान भी कर दया। कांग्रेस बताती है कि उसके शासन काल में भी सर्जिकट स्ट्राइक हुई थी। इसी बात पर पीएम ने जवाब दिया और कहा, “कांग्रेस किस मुंह से सर्जिकल स्ट्राइक की बात करती है। इनकी सरकार के दौरान हालात ऐसे थे कि सेना के पास जरूरी सामान तक नहीं थे।”

पीएम मोदी ने कहा, उस समय सेना के पास बुलेटप्रूफ जैकेट तक नहीं थे। सैनिकों के लिए जूते तक नहीं थे। सेना का मनोबल इतना गिरा हुआ था कि उन्हें सर्जिकल स्ट्राइक का आदेश कौन देता। ऐसा करके कांग्रेस 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक का महत्व कम कर रही है।

आगे उन्होंने कहा, सेना को बदनाम करने का काम कांग्रेस सरकार ने किया। ऐसा भारत में पहले कभी नहीं हुआ था। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि किसकी भलाई के लिए राफेल डील रद्द कराना चाहती है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस का यह मानना है कि रक्षा सौदे बिना दलाली के हो ही नहीं सकते। क्योंकि इनके कार्यकाल में बिना दलाली के सौदे पूरे नहीं होते थे।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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