Connect with us

नेशनल

महागठबंधन के बीच ज्योतिषाचार्य ने मायावती को लेकर की ऐसी भविष्यवाणी, जानकर दंग रह जाएंगे आप!

Published

on

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सीटों पर मिली जीत से उत्साहित समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने महागठबंधन बना लिया। महागठबंधन की घोषणा दोनों ने लखनऊ के होटल ताज में शनिवार को की।

 

महागठबंधन के बाद माना जा रहा है कि बीजेपी की राहें मुश्किल हो गई हैं। लेकिन बीजेपी से बुरी स्थिति कांग्रेस की है। साल 2017 में सपा के साथ चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस का मुकाबला बीजेपी और बसपा के साथ है तो है ही साथ ही इस बार अखिलेश यादव के साथ भी यूपी में उन्हें मुकाबला करना पड़ेगा। इस महागठबंधन के बीच बृज के ज्योतिषाचार्य ने मायावती को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है।

वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने मायावती की चंद्र कुंडली का विश्लेषण किया तो ये बात सामने आई कि वर्तमान में गोचरीय ग्रह चाल में मायावती की मकर राशि पर देवगुरु बृहस्पति ग्रह का आशीर्वाद 11 अक्टूबर 2018 से लेकर 4 नवम्बर 2019 तक है। बसपा सुप्रीमो मायावती की चन्द्र राशि मकर से लाभ भाव अर्थात इच्छापूर्ति के स्थान में स्थित है, जो कि मायावती को अन्य दलों के साथ तालमेल के माध्यम से तालमेल को दर्शाता है।

उन्हें 2019 के लोकसभा चुनावों में उपयुक्त मुकाबला करने और चुनावी दौड़ में बने रहने में मदद करेगा। हालांकि,मायावती को उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलेंगे क्योंकि उनकी जन्मकुंडली में अन्य प्रतिकूल ग्रहों की स्थिति ऐसा करने से रोक रही हैं। वर्तमान में आम जनता का कारक ग्रह शनि ग्रह 26 अक्टूबर 2017 से लेकर 24 जनवरी 2020 तक बसपा सुप्रीमो मायावती की राशि मकर से बारहवें भाव अर्थात अशुभ भाव में विराजमान रहेगा।

अर्थात पूरी तरह शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव में हैं, जिसके परिणामस्वरूप मायावती को आम जनता से और अपने सहयोगियों से इतने शुभ और अच्छे परिणाम प्राप्त नहीं होंगे। जैसे कि बसपा सुप्रीमो मायावती 2019 के लोकसभा चुनावों में आशा कर रही हैं। वर्तमान में मायावती को इस शनि ग्रह की नकारात्मक विपरीत परिस्थितियों के दौरान अपनी ही पार्टी बसपा के अन्दर छुपे हुए गुप्त शत्रुओं से विशेष से सावधान रहने की जरूरत है।

उनके गुप्त शत्रु भीतरघात कर सकते हैं। 7 मार्च 2019 से शनि और छाया ग्रह केतु की एक साथ युति वर्ष 2019 में पूरे वर्ष मायावती की मकर राशि से अशुभ भाव में विराजमान रहेगी, जो अचानक मायावती को अपने सहयोगियों से नुकसान कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी गुप्त रूप से। राहु और केतु हमेशा छुप कर आक्रमण करने के लिए प्रसिद्ध हैं समुद्र मंथन के प्राचीन काल से।

उन्होंने बताया कि बसपा प्रमुख मायावती की जन्मकुंडली के अनुसार वर्तमान में बसपा प्रमुख मायावती की जन्मकुंडली में वर्तमान में बुध की महादशा में शुक्र ग्रह की अंतर्दशा अवधि चल रही है। जो गुप्त कूटनीतिक रणनीति के माध्यम से अपने कार्यों को सिद्ध करने में मददगार साबित हो सकती है।

आने वाले लोकसभा 2019 के चुनावों में मायावती की पार्टी के वोट प्रतिशत का भाग उत्तर प्रदेश के अन्दर बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही मायावती दलित वर्ग में एक कुशल नेतृत्व की योग्यता के कारण वह कुछ मामलों में दलित वर्ग को उत्तर प्रदेश में विश्वास दिलाने में कामयाब रहेंगी। लोकसभा 2019 के चुनावों में उत्तर प्रदेश में उनके जनाधार में भी वृद्धि होने की संभावना है। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि 2019 के आगामी महीनों में मायावती की छवि को उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से बढ़ावा मिल सकता है।

 

नेशनल

बीजेपी के इस उम्मीदवार पर दर्ज हैं इतने मुकदमें, ब्योरा देने में भर गए चार पन्ने

Published

on

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों को चुनाव आयोग में हलफनामे के जरिए अपनी पूरी डिटेल देने पड़ती है। हलफनामे में उम्मीदवार को अपने बारे में छोटी से छोटी जानकारी देनी होती है।

केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार सुरेंद्रन ने भी एफिडेबिट के जरिए चुनाव आयोग को अपनी डिटेल दी है लेकिन इस जानकारी की वजह से उनका नाम सुर्खियों में आ गया है।

दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं। भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है।

जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।

पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, ‘यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।’

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending