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BIG BREAKING: पुलिस को फिर मिला नरेंद्र मोदी को जान से मारने का धमकी भरा ई-मेल!

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नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जान से मारने का धमकी भरा ई-मेल एक बार फिर दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक को भेजा गया है।

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले भी पीएम के लिए धमकी भरा ई-मेल दिल्ली पुलिस आयुक्त को भेजा गया था। मिली जानकारी के मुताबिक इस ई-मेल के मिलने के बाद एसपीजी ने पीएम मोदी का सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है।

फिलहाल इस मामले में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो एक सप्ताह पूर्व ई-मेल आया है।

इसमें लिखा है कि पाक खुफिया एजेंसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या कराने के लिए कुछ संदिग्ध लोगों को भेज दिया है। जल्द ही हमला कर दिया जाएगा।

इस ई-मेल के बाद सतर्क हुई पुलिस को छानबीन में ई-मेल के दक्षिण भारत से से आने के बात पता चली है। खुफिया एजेंसियां इसकी पड़ताल में जुट गई हैं। इससे पहले अगस्त में भेजे गए ई-मेल में प्रधानमंत्री को 19 सितंबर को मारने की धमकी दी गई थी।

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प्रवासी कामगारों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की- सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से प्रवासी कामगार अपने राज्य लौट रहे हैं। अपने घर वापस लौटने के दौरान उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस अशोक भूषण, संजय किशन कौल और एमआर शाह ने केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेजते हुए 28 मई तक जवाब देने के लिए कहा था। कोर्ट ने पूछा था कि उनकी स्थिति में सुधार के लिए आखिर क्या कदम उठाए गए हैं।

गुरूवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उच्चतम न्यायलय ने सुनवाई के दौरान कहा कि ‘पैदल चल रहे मजदूरों को जल्द आश्रय स्थल पर ले जाएं और उन्हें सारी सुविधाएं दें।’

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें इस बात की चिंता है कि प्रवासी मजदूरों को घर वापस जाने के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हमने नोटिस किया है कि रजिस्ट्रेशन की प्रकिया, ट्रांसपोटेशन के साथ-साथ उनके खाने-पीने के इंतजाम में काफी खामियां हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को घर भेजने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि अभी तक 91 लाख प्रवासियों को उनके घर भेजा जा चुका है। इनमें से 80 प्रतिशत के करीब बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।

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