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गंगा को बचाने के लिए 111 दिनों से अनशन कर रहे जीडी अग्रवाल का निधन

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जीडी अग्रवाल

नई दिल्ली। 111 दिनों से गंगा नदी को बचाने के लिए अनशन कर रहे पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ ज्ञानस्वरूप सानंद का गुरुवार को निधन हो गया। ज्ञानस्वरुप लगभग 4 महीनों से गंगा एक्ट की मांग को लेकर अनशन पर थे। ज्ञानस्वरुप ने ऋषिकेश स्थित एम्स में अंतिम सांस ली।

एम्स के निदेशक डॉ. रविकांत ने बताया कि स्वामी सानंद ने अपना शरीर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा शिक्षा के छात्रों के उपयोग के लिए दान कर दिया था। उन्होंने बताया कि स्वामी सानंद हाइ ब्लड प्रेशर, हार्निया, कोरोनरी आर्टरी रोग से पीड़ित थे। 111 दिन अनशन पर रहने की वजह से उनकी सेहत और ज्यादा खराब हो गई थी।

जीडी अग्रवाल

गंगा को स्वच्छ करने के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का अनशन खत्म कराने के लिए पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री उमा भारती उनसे मिलने गई थीं और नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी से उनकी फोन पर बात भी कराई थी। लेकिन प्रोफेसर अग्रवाल ने गंगा एक्ट लागू होने तक अनशन जारी रखने की बात कही थी।

नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि प्रोफेसर अग्रवाल की कुछ मांगें मान ली गईं थीं। सरकार की ओर से आश्वासन लेकर पहुंचे हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने उनसे अनशन खत्म करने का अनुरोध भी किया था, लेकिन उन्होंने अनुरोध को ठुकरा दिया था। इस बीच, गंगा संरक्षण को लेकर स्वामी सानंद के प्राण त्यागने के बाद ‘मातृसदन’ के प्रमुख परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने उनके निधन को हत्या करार दिया है और उनकी मौत की उच्च्स्तरीय जांच की मांग की है।

 

 

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राफेल सौदे पर कांग्रेस ने एक बार फिर किया पीएम मोदी पर तीखा हमला, कह दी ये बड़ी बात!

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नई दिल्ली। राफेल सौदा मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर एक बार फिर से करारा हमला बोला है।  कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि तथ्यात्मक गलती के लिए पूरी तरह से नरेंद्र मोदी पूरी तरह से जिम्मेदार है।

कांग्रेस ने कहा कि अदालत सौदे में भ्रष्टाचार की जांच के लिए सही मंच नहीं है और न ही यह फैसला केंद्र की भाजपा नीत सरकार को ‘क्लीन चिट’ है।

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने यहां मीडिया को संबांधित करते हुए कहा कि शुक्रवार का फैसला ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ था, जिसके लिए मोदी नीत केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

सिब्बल ने कहा, “फैसले में तथात्मक गलती है, जिसके लिए सरकार जिम्मेदार है, न कि अदालत। अगर आप अदालत को गलत तथ्य देंगे और उस आधार पर अदालत तथ्यात्मक दावे करती है, तो इस मामले में सरकार जिम्मेदार है।”

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि ‘सौदे की कीमत से संबंधित जानकारी कैग के साथ साझा की गई है और कैग की रपट लोक लेखा समिति(पीएसी) द्वारा जांची गई’। सिब्बल ने कहा कि कैग की रपट के किसी भी हिस्से को संसद में पेश नहीं किया गया और न हीं यह सार्वजनिक है।

उन्होंने कहा, “हमें महान्यायवादी को पीएसी में तलब करना चाहिए और उनसे पूछना चाहिए कि क्यों इस प्रकार के दावे अदालत के समक्ष किए गए और क्यों ऐसे हलफनामे पेश किए गए, जो सच्चाई नहीं दर्शाते हैं।”

पूर्व कानून मंत्री ने कहा, “अदालत के समक्ष इस तरह के गलत तथ्य पेश करने के लिए महान्यायवादी जिम्मेदार हैं। यह एक संगीन मुद्दा है और संसद में इसपर चर्चा होनी चाहिए। पीएसी महान्यायवादी को बुलाएंगे।”

इस ओर ध्यान दिलाते हुए कि सर्वोच्च न्यायालय ने कीमत के मुद्दे या फिर विमान के तकनीकी पहलुओं पर फैसला नहीं सुनाया, सिब्बल ने मोदी सरकार को फैसले को खुद के लिए क्लीन चिट बताने पर निशाना साधा।

सिब्बल ने भाजपा के प्रमुख नेताओं द्वारा फैसले को मोदी सरकार के लिए क्लीन चिट बताने और कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाने वाले बयानों के संदर्भ में कहा, “यह बचकानी बात है कि सरकार और भाजपा जीत का दावा कर रही है।”

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