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डॉक्टर्स को मिली बड़ी कामयाबी, भारत में पहली बार सफल रहा खोपड़ी का ट्रांसप्लांट

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भारत के पुणे शहर में पहली बार स्कल ट्रांसप्लांट की सर्जरी की गई। यह सर्जरी सफल हुई है। दरअसल, 4 साल की बच्ची का 60 फीसदी खोपड़ी डैमेज हो चुका था। एक सड़क दुर्घटना में बच्ची की खोपड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।

जिसके बाद थ्री-डायमेंशनल इंडीविजुअलाइज पॉलिथीन बोन लगाई है। यह एक तरह की हड्डियां हैं जिन्हें अमेरिका स्थित एक कंपनी ने बनाया है। इनकी लंबाई और आकार डैमेज स्कल के बराबर था। इस बच्ची का यह ऑपरेशन देश का पहला स्कल ट्रांसप्लांट बताया जा रहा है। जो की सफल रहा|

बच्ची का इलाज करने वाले भारती अस्पताल के डॉक्टर जितेंद्र ओस्वाल का कहना है कि ‘एक्सिडेंट का असर बहुत ही घातक था। उसे अचेत अवस्था में अस्पताल में लाया गया। उसके सिर से बहुत खून निकल रहा था। जिसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। सीटी स्कैन में पता चला कि उसकी स्कल के पीछे की हड्डी में फ्रैक्चर आया है जिसके चलते वह सूज गई है।’

उसके बाद बच्ची की दो सर्जरी करके घर भेज दिया गया था। डॉक्टर्स ने इस साल उसे दोबारा अस्पताल में भर्ती किया था और अब सफलतापूर्वक  उसकी खोपड़ी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हुई। सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार होने लगा है।

बच्ची की मां ने बताया, ‘वह स्कूल जा रही है और पूरे मजे से दोस्तों के साथ खेल रही है। अब वह पहले की तरह खुश है और चहक रही है।’ बच्ची के पिता स्कूल बस चलाते हैं।

Image CopyRight : Google 

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विक्रम से संपर्क की उम्मीदें खत्म, इसरो ने देशवासियों के लिए कही ये बात

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नई दिल्ली। चंद्रमा पर रात होने के बाद अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की विक्रम लैंडर से संपर्क करने उम्मीद खत्म हो चुकी है। मंगलवार को इसरो ने देशवासियों से मिले अपार समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद कहा।

यह इसरो का दूसरा चंद्र मिशन था जो कि आंशिक रूप से सफल हो सका। इस मिशन को आंशिक रूप से सफल इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चांद की सतह से मजह 2.1 किमी की ऊंचाई से इसका संपर्क इसरो केंद्र से टूट गया था।

संपर्क टूटने के बाजजूद देशवासियों और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो की हौसलाफजाई की थी। जिससे खुश होकर इसरो ने मंगलवार शाम को ट्वीट करते हुए सभी का धन्यवाद किया।

इसरो ने ट्वीट कर कहा, ‘हमारे साथ खड़े रहने के लिए आपका शुक्रिया। हम दुनियाभर में सभी भारतीयों की आशाओं और सपनों को पूरा करने की कोशिश करते रहेंगे। हमें प्रेरित करने के लिए शुक्रिया।’

इस मिशन को लेकर अच्छी खबर यह है कि ऑर्बिटर लगातार चंद्रमा के चक्कर काट रहा है और उसकी तस्वीरें भेज रहा है। इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर 7 साल तक चांद का चक्कर इसी तरह काटने में सक्षम है।

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