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देहरादून अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 21 सितंबर से

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नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)| देहरादून अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (डीआईएफएफ) का चौथा संस्करण राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी में 21 से 23 सितंबर तक आयोजित होगा। महोत्सव में क्षेत्रीय फिल्में, लघु फिल्में, वृत्त चित्र और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्में जैसे ‘द सेव्यर’, ‘नूरी : द लाइट’, ‘पंखुड़ी’, ‘किस्मत’ और ‘राजा बजरंगी’ दिखाई जाएंगी।

एक बयान में कहा गया कि चौथे संस्करण में न केवल फिल्म उद्योग की जानी-मानी हस्तियां जैसे रमेश सिप्पी, शर्मन जोशी, विवेक वासवानी और हेमंत पांडे नजर आएंगी बल्कि नामी-गिरामी लेखक, कला, संस्कृति जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां भी शामिल होंगी।

देहरादून अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आयोजित करने के पीछे का मकसद स्थानीय प्रतिभाओं को उनका काम दिखाने का मौका देकर मंच प्रदान करना है और उन फिल्मों की स्क्रीनिंग करना है जो एक मजबूत व प्रभावी संदेश देती हैं।

फिल्म महोत्सव के निदेशक राजेश शर्मा ने कहा, सुभाष घई, प्रेम चोपड़ा, दिव्यी दत्ता, रणवीर शौरी जैसी बॉलीवुड हस्तियों के साथ हमें सभी का जबरदस्त सहयोग मिल रहा है। उत्तराखंड को डीआईएफएफ के माध्यम से सिनेमा, कला और संस्कृति का जश्न मनाने के लिए नैचुरल हब बनाने का हमारा विजन सच होगा।

फिल्म महोत्सव का समापन एक पुरस्कार समारोह के साथ होगा, जिसमें लघु फिल्म, फीचर फिल्म के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी प्रदान किया जाएगा।

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कलाकार के तौर पर सभी भाषाओं के लिए तैयार हूं : आशीष विद्यार्थी

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 नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)| राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने हिंदी, तेलुगू, मलयाली और बांग्ला जैसी भाषाओं में सैकड़ों फिल्में की हैं लेकिन उनके अंदर का अभिनेता अभी शांत नहीं हुआ है।

  उन्हें यह भी लगता है कि बॉलीवुड में उनके पास कम अवसर हैं।

कुछ सप्ताह पहले फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने कहा था कि बॉलीवुड ने आशीष की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया है और उन्हें बहुत कमतर आंका गया है और उनसे उनकी क्षमता से कम लिया गया है।

आशीष ने हंसते हुए कहा, “मैं (भारद्वाज से सहमत) हूं।”

उन्होंने आईएएनएस को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, “कई किरदार हैं और मुझे उनमें से कोई भी करने का अवसर नहीं मिला है। मैं मजाक में लोगों से कहता हूं, ‘कभी-कभी मैं सोचता हूं कि क्या फिल्म उद्योग मेरे मरने का इंतजार कर रहा है और बाद में कहें कि बुरा हुआ। वह अच्छा अभिनेता था। उसे कमतर आंका गया और उसे पर्याप्त मौके नहीं मिले।”‘

वे फिल्म निर्माताओं को बताना चाहते हैं कि वे यहीं हैं।

‘अलीगढ़’ के अभिनेता ने कहा, “कई किरदार हैं और मैं निर्देशकों का इंतजार कर रहा हूं। कलाकार उपस्थित है।”

वे हिंदी फिल्म उद्योग में 90 के शुरुआती दशक से हैं और वे मानते हैं कि उन्होंने सशक्त किरदारों के लिए अपनी प्रतिभा और भूख को जिंदा रखा है।

एक यात्री से अपनी तुलना करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अन्य भाषाओं में 200 से ज्यादा फिल्में की हैं।”

उन्होंने कहा, “मेरी यात्रा के समय को धन्यवाद, जो कई अन्य भाषाओं ने मेरी खोज की। मैं उनका प्रतिनिधित्व करता हूं। मैंने अपना ज्यादातर सफर तय कर लिया है। मैं भाषाओं से परे एक कलाकार के तौर पर उपलब्ध हूं। मैं मजेदार किरदार की प्रतीक्षा में हूं. हिदी में भी।”

विद्यार्थी को ‘द्रोह काल’, ‘1942 : ए लव स्टोरी’, ‘अर्जुन पंडित’, ‘वास्तव : द रिएलिटी’ और ‘कहो ना.. प्यार है’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है।

तीन दशक के अपने अभिनय करियर से खुश होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैं आभारी हूं और आगे भी तैयार हूं। एक कलाकार की यात्रा चलती रहती है।”

वे फिलहाल अभिनेत्री अमाला पॉल के साथ अपनी तमिल फिल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।

अभिनय के अलावा वे खुद को प्रेरक वक्ता के तौर पर भी व्यस्त रखते हैं।

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