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जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र ने अटल से पूछा लिया, “आपने शादी क्यों नहीं की?”

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लखनऊ। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत माता के एक ऐसे सपूत थे, जिन्होंने स्वतंत्रता से पहले और बाद में भी अपना जीवन देश और देशवासियों के कल्याण के लिए जिया। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को जन्में अटल बिहारी वाजपेयी के परिवार को भी शायद ही यह अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका एक ये नन्हा सा बालक पूरे देश और दुनिया में भारत का नाम रौशन करेगा।

आज अटल हमारे बीच नहीं हैं। ऐसे में हर तरफ सिर्फ अटल से जुड़े किस्से ही सुनाए जा रहे हैं। ऐसे में एक किस्सा वो भी है जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र ने उनसे पूछ लिया था कि, “आपने शादी क्यों नहीं की?”

अटल बिहारी वाजपेयी जी से एक दिन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का एक समूह मिलने आया। उनमें से एक छात्र ने उनसे पूछा, “आपने शादी क्यों नहीं की?” अटलजी ने ठहाका लगाते हुए कहा, “‘यार जब शादी की उम्र थी तब जिंदगी की मस्ती ने इस बारे में सोचने का मौका ही नहीं दिया। अब जब सोचता हूं तो कोई मिलती नहीं।”

छात्र काफी देर तक हंसते रहे। थोड़ी देर बाद जब ये विद्यार्थी लौटने को उठे तो अटलजी ने फिर उस छात्र से कहा- “यार! देखना, अगर कोई मिले तो ज़रूर बताना।”

आज अटल जी के जाने से पूरा देश और खासकर लखनऊ गहरे शोक में है। न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरा देश अटल जी जैसे जननेता और कवि को कभी भुला नहीं पाएगा। ‘आज की खबर’ भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अश्रुपूर्ण श्रृद्धांजलि अर्पित करता है।

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रेलवे में ख़त्म होगा खलासी सिस्टम, नहीं होंगी नई भर्तियां

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय रेलवे में नौकरी करने का सपना संजोए हुए हैं तो आपके लिए बुरी खबर है। दरअसल रेलवे अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर काम करने वाले ‘बंगला पियुन’ या खलासियों की नियुक्ति की औपनिवेशिक काल की प्रणाली को समाप्त करने की तैयारी कर रहा है और इस पद पर अब कोई नई भर्ती नहीं की जाएगी। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को आदेश जारी किया।

रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है कि टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी (TADK) संबंधी मामले की समीक्षा की जा रही है. आदेश में कहा गया है, ‘टीएडीके की नियुक्ति संबंधी मामला रेलवे बोर्ड में समीक्षाधीन है इसलिए यह फैसला किया गया है कि टीएडीके के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए और न ही तत्काल नियुक्ति की जानी चाहिए।

आदेश में कहा गया है, ‘इसके अलावा, एक जुलाई 2020 से इस प्रकार की नियुक्तियों को दी गई मंजूरी के मामलों की समीक्षा की जा सकती है और इसकी स्थिति बोर्ड को बताई जाएगी। इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए।

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