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‘मैं नरेंद्र मोदी की पत्नी हूं और वो मेरे राम’, जशोदाबेन ने दिया आनंदीबेन को दो टूक जवाब!

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नरेंद्र मोदी

अहमदाबाद। हाल ही में मध्यप्रेदश की राज्यपाल आनंदीबने पटेल ने एक बयान दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अविवाहित हैं। अपने इस बयान की वजह से आनंदीबेन सुर्खियों में आ गईं थीं। अब इस बयान पर नरेंद्र मोदी की परित्यक्ता पत्नी जशोदाबेन का बयान आया है। बुधवार को आनंदीबेन पटेल के गुजरात के एक प्रमुख दैनिक में मोदी को अविवाहित बताने पर उन्होंने आश्चर्य जताया है।

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जशोदाबेन ने अपने भाई के मोबाइल फोन से बनाए गए एक वीडियो में कहा, मैं आनंदीबेन द्वारा प्रेस से नरेंद्र भाई का विवाह नहीं होने की बात कहने से हैरान हूं। उन्होंने खुद लोकसभा चुनाव के दौरान 2004 में अपने दस्तावेज दाखिल करते हुए इसे अपनी घोषणा में शामिल किया है कि वह विवाहित हैं और उसमें मेरे नाम का उल्लेख किया है।

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जशोदाबेन ने कहा, एक सुशिक्षित महिला (गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन) द्वारा एक शिक्षक (जशोदाबेन) के बारे में इस तरह बोलना बहुत ही अशोभनीय है। सिर्फ इतना ही नहीं उनके आचरण ने भारत के प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल किया है। वह मेरे लिए बहुत ही सम्माननीय है, वह मेरे राम हैं।

उत्तर गुजरात के अपने गृहनगर ऊंझा से आईएएनएस के साथ बातचीत में जशोदाबेन के भाई अशोक मोदी ने इस बात की पुष्टि की कि वीडियो में जशोदाबेन बात कर रही हैं।

उन्होंने कहा, जब आनंदीबेन का बयान सोशल मीडिया पर आया तो हमे विश्वास नहीं हुआ.. लेकिन यह 19 जून को प्रमुख अखबार दिव्य भास्कर में आया। अब यह गलत नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, इसी वजह से हमने इसका उत्तर देने का फैसला किया। हमने अपने घर के मोबाइल फोन से एक लिखित बयान जशोदाबेन के द्वारा पढ़ा जाता रिकॉर्ड किया।

 

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हैदराबाद एनकांउटर केसः सीजेआई बोले-बदले की भावना से किया गया न्याय सही नहीं

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नई दिल्ली। हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबडे की प्रतिक्रिया सामने आई है।उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है। जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए, मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है।”

इस दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी वहीं मौजूद थे। जस्टिस जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी आनन-फानन में किया नहीं जाना चाहिए।

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