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अगर पांच करोड़ रुपए पाना है तो आयकर विभाग की नई योजना में हों शामिल

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अगर पांच करोड़ रुपए ईनाम पाना है तो आयकर विभाग जाए और उनकी इस योजना में सहायक बनें तो करोड़पति बनने की इच्छा पूरी हो जाएगी।

आयकर विभाग ‘आयकर मुखबिर पुरस्कार योजना, 2018’ नामक नई पुरस्कार योजना जारी की है। यह योजना 2007 में जारी पुरस्कार योजना का स्थान लेगी होगी। इस योजना का उद्देश्य काले धन का पता लगाने और कर चोरी में कमी लाने के प्रयासों में लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

बेनामी संपत्तियों पर शिकंजा कसने के मकसद से आयकर विभाग ने कुछ नए कदम उठाए हैं। जिसके बाद बेनामी लेनदेन या काले धन से संबंधित खास सूचना देनेवालों को आयकर विभाग एक करोड़ रुपए ईनाम के तौर पर दे सकता है। वहीं, देश से बाहर पैसा रखने वालों के खिलाफ जानकारी देने पर 5 करोड़ रुपए ईनाम मिलेगा।

संशोधित योजना के अंतर्गत भारत में आय और परिसंपत्तियों पर कर चोरी के बारे में आयकर विभाग में जांच निदेशालय के निर्दिष्ट अधिकारियों को तय प्रक्रिया के अंतर्गत विशेष सूचना देने वाले व्यक्ति 50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि प्राप्त कर सकता है।

भारत सरकार ने इससे पहले काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा करारोपण अधिनियम 2015 लागू किया था ताकि भारत में कर योग्य लोगों द्वारा विदेशों में रखी गई आय और परिसंपत्तियों की जांच की जा सके। इन पर करों की वसूली की जा सके तथा दंड और मुकदमे जैसे कदम उठाए जा सकें। काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा करारोपण अधिनियम, 2015 के अंतर्गत कार्रवाई योग्य ऐसी आय और परिसंपत्तियों के बारे में सूचना देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई पुरस्कार योजना में 5 करोड़ रुपए तक का पुरस्कार शामिल किया गया है। पुरस्कार राशि अधिक रखी गई है ताकि विदेशों के संभावित स्रोत आकर्षित हो सकें।

इस योजना के अंतर्गत काला धन (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) तथा करारोपण अधिनियम, 2015 के तहत कार्रवाई योग्य विदेशों में आय और परिसंपत्तियों पर कर चोरी के बारे में तय प्रक्रिया के अंतर्गत विशेष सूचना देने वाले व्यक्ति पुरस्कार राशि प्राप्त कर सकता है।

इस योजना के अंतर्गत सूचना निर्धारित प्रक्रिया में आयकर महानिदेशक (जांच) या अधिकृत अधिकारी को देनी होगी। इस योजना के लिए विदेशी भी पुरस्कार पाने के पात्र होंगे। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान प्रकट नहीं की जाएगी और पूरी गोपनीयता बरती जाएगी।

संशोधित पुरस्कार योजना के ब्यौरे आयकर मुखबिर पुरस्कार योजना, 2018 में उपलब्ध है जिसकी कॉपी आयकर कार्यालयों में तथा आयकर विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध है।

Independence Day

स्वतंत्रता दिवस 2020 : आखिरी क्यों लाल किले पर ही पीएम फहराते हैं तिरंगा ?

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15 अगस्त के दिन गली नुक्कड़ और चौराहों पर देशभक्ति गीतों की स्वर लहरियां बह रही हैं। आज़ादी के इस पर्व में प्रत्येक भारत वासी शरीक होता है और अपने अपने अंदाज में इस दिन को जीता है।

साभार – INTERNET

आज़ादी से लेकर आज के दिन तक स्वतन्त्रता दिवस पर दिल्ली के लालकिले पर प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा फहराया जाता है। लेकिन आपके मन मे एक प्रश्न जरूर उठता होगा कि तिरंगा फहराने के लिए आखिर लालकिला ही क्यों? अन्य ऐतिहासिक महत्व की इमारतें भी हैं जहाँ हमारा प्यारा तिरंगा लहरा सकता है। आइये आपको हम लालकिला के इतिहास के बारे में पूरे विस्तार से बताते हैं।

ये तो सभी को पता हैं कि लाल किले का रंग लाल हैं। इसलिए उसका नाम भी लाल किला पड़ गया, लेकिन आपको बता दें एक समय ऐसा भी था जब लाल किले का रंग सफ़ेद हुआ करता था। शुरू में इसे चूने के पत्थरों से बनाया गया था लेकिन अंग्रेजो के शासनकाल में लाल किला अपनी चमक होने लगा था और इसलिए इस पर लाल रंग पुतवा दिया था।

 

साभार – INTERNET

10 मई 1857 को मेरठ में क्रांति की शुरुआत हुईं और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सिपाहियों ने अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ़ खुला विद्रोह किया था। 1857 में हुई क्रांति के दौरान अंग्रेजो ने अपना गुस्सा निकालने के लिए लाल किले के कई हिस्सों को तबाह कर दिया था और कोहिनूर हीरे को ब्रिटेन पंहुचा दिया था।

जब भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। तब 15 अगस्त 1947 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने सबसे पहले लाल किले पर ही आजादी का ऐलान किया था। इसके बाद से ही लाल किला भारतीय सेना का गढ़ बन गया और 22 दिसंबर 2003 को इस इमारत को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग को सौंप दिया था।

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