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उत्तराखंड

उत्तराखंड में किसानों की मदद के लिए आगे आया फिक्की

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उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि, उद्यान, पशुपालन और दुग्ध विकास से जुड़े लोगों को फायदा दिलाने और उनकी आय में सुधार लाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने भारतीय वाणिज्य व उद्योग महासंघ (फिक्की) के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है।

फिक्की के सदस्यों से आर्गेनिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में सहयोग करने की बात रखते हुए मुख्यमंत्री, उत्तराखंड त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा,” प्रदेश के आर्गेनिक उत्पादों की प्रदेश के बाहर भी बड़ी मांग है। आर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हम महिला स्वयं सहायता समूहों को भी सशक्त कर ग्रामीण विकास में उनकी भी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।

महिला स्वयं सहायता समूहों को दी जाएगी मदद। ( फोटो – आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन )

बैठक में मुख्यमंत्री ने फिक्की के सदस्यों से कृषि बागवानी, दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में सहयोग के साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण से संबंधित विभागों के सचिवों के साथ विचार विमर्श किया और इस संबंध में प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।

इस मौके पर फिक्की के उप महासचिव निरंकार सक्सेना ने मुख्यमंत्री को बताया,” हमें उत्तराखंड के ग्रामीण आजीविका मिशन के उद्देश्य से उत्तराखंड को हर्बल मेडिसिनल पौधों के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इसके अलावा हमारी कोशिश रहेगी कि हम ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्माण पर ग्रामीणों को प्रोत्साहित करें, ताकि उनकी आमदनी भी बढ़ाई जा सके।”

आर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए इस अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश की साध्वी भगवती व फिक्की के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को रूद्राक्ष का पौधा व पुस्तकें भेंट की।

” गंगा की सफाई भी हमारे टार्गेट में शामिल है। इसमें फिक्की, गंगा रिवर इंस्टीट्यूट, परमार्थ निकेतन का सहयोग लिया जाएगा।” निरंकार सक्सेना ने बताया।

उत्तराखंड

उत्तराखंड के ये शहर 2020 तक हो जाएंगे पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त

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देहरादून। सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के समक्ष प्रदेश के पांच शहरों देहरादून, ऋषिकेश, मसूरी, नैनीताल और हल्द्वानी को सन् 2020 तक प्लास्टिक मुक्त करने विषयक कार्य योजना का शहरी विकास विभाग द्वारा प्रस्तुतीकरण किया गया।

प्रस्तुतीकरण के दौरान अवगत कराया गया, कि विभाग द्वारा 50 माईक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक थैलों को पूर्णतः प्रतिबन्धित करने का शासनादेश के अनुपालन में सख्ती से कार्रवाई की जा रही है तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के विषय मेंं व्यापार मण्डल, स्कूली छात्र, समाचार पत्रों आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार लगातार किया जा रहा है।

बताया गया, कि उत्तराखण्ड कूड़ा फेंकना एवं थूकना प्रतिषेध अधिनियम 2016 दिनांक 30-11-2016 के अंतर्गत अब तक 1560 चालान कर रू0 7.57 लाख का अर्थ दण्ड दोषियों से वसूला गया है। बैठक में बताया गया, कि उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियमावली व प्रतिबंधित प्लास्टिक के प्रकार की सूची बनाई जा रही है। प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि नगर निकाय क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी प्रकार के प्लास्टिक व थर्माकोल से बनी थैलियां, पत्तल, ग्लास, कप, पैकिंग सामग्री इत्यादि का इस्तेमाल तत्काल प्रभाव से पूर्णतः प्रतिबंधित है।

प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया, कि प्रथम चरण में प्रदेश के पांच शहरों देहरादून, ऋषिकेश, मसूरी, नैनीताल एवं हल्द्वानी में निर्धारित प्राविधान के तहत 4947 लोगों से चालान द्वारा अक्टूबर 2019 तक रू 58.13 लाख की वसूली की गई तथा 11 सितम्बर से 27 अक्टूबर, 2019 तक प्रदेश में चलाए गए ‘‘स्वच्छता ही सेवा‘‘ अभियान के अंतर्गत 35.76 मी0टन प्लास्टिक संग्रहण किया गया तथा 13.88 मी0टन प्लास्टिक रिसाईकिल किया गया।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी में प्लास्टिक काम्पेक्टर के लिए धनराशि जारी कर दी गई है तथा मसूरी में प्लास्टिक काम्पेक्टर उपलब्ध है एवं नैनीताल से संग्रहित प्लास्टिक का रिसाईक्लिंग कार्य हल्द्वानी में किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि प्लास्टिक से ईंधन बनाने की योजना हरिद्वार में प्रस्तावित है, जिसके लिए शीघ्र ही आरएफपी प्रकाशित की जा रही है।

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