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अन्तर्राष्ट्रीय

तुर्की में एलजीबीटी से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियों पर रोक

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अंकारा, 20 नवंबर (आईएएनएस)| तुर्की की राजधानी अंकारा में सार्वजनिक संवेदनशीलता की वजह से एलजीबीटी मुद्दों से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अंकारा के गवर्नर कार्यालय की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया, शांति और सुरक्षा के लिए 18 नवंबर से लेकर आगामी सूचना तक सभी फिल्मों, थिएटर प्रस्तुतियों, स्क्रीनिंग, पैनल चर्चा और प्रदर्शनियों में प्रतिबंध प्रभावी रहेगा।

जर्मनी के दो दिवसीय समलैंगिक फिल्मोत्सव पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देश में वार्षिक लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) प्राइड मार्चेज पर पिछले तीन वर्षो से प्रतिबंध लगा है।

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अन्तर्राष्ट्रीय

कुवैत में संसद भंग, सभी कानून और संविधान के कुछ अनुच्छेद निलंबित

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नई दिल्ली। कुवैत के अमीर शेख मिशाल ने संसद को भंग कर दिया है। अमीर ने शुक्रवार को सरकारी टीवी पर एक संबोधन में इसकी घोषणा की। इसके अलावा अमीर ने देश के सभी कानूनों के साथ संविधान के कुछ अनुच्छेदों को चार साल तक के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। सरकारी टीवी के मुताबिक, इस दौरान नेशनल असेंबली की सभी शक्तियां अमीर और देश की कैबिनेट के पास होंगी।

एमीर ने सरकारी टीवी पर दिए अपने संबोधन में संसद भंग करने की घोषणा करते हुए कहा, “कुवैत हाल ही में बुरे वक्त से गुजर रहा है, जिसकी वजह से किंगडम को बचाने और देश के हितों को सुरक्षित करने के लिए कड़े फैसले लेने में झिझक या देरी करने के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में देश के कई डिपार्टमेंट्स में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। भ्रष्टाचार की वजह से देश का महौल खराब हो रहा है। अफसोस की बात ये है कि भ्रष्टाचार सुरक्षा और आर्थिक संस्थानों तक फैल गया है। साथ ही अमीर ने न्याय प्रणाली में भ्रष्टाचार होने की बात कही है।

कुवैत पिछले कुछ सालों से घरेलू राजनीतिक विवादों से घिरा रहा है। देश का वेल्फेयर सिस्टम इस संकट का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और इसने सरकार को कर्ज लेने से रोका है। इसकी वजह से अपने तेल भंडार से भारी मुनाफे के बावजूद सरकारी खजाने में पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बहुत कम पैसे बचे हैं। कुवैत में भी दूसरे अरब देशों की तरह शेख वाली राजशाही सिस्टम है लेकिन यहां की विधायिका पड़ोसी देशों से ज्यादा पावरफुल मानी जाती है।

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