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मनोरंजन

परंपरा में विश्वास नहीं करता : शाहरुख

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हिंदी फिल्म नगरी में परिवारवाद की परंपरा पुरानी है, लेकिन गैर फिल्मी पृष्ठभूमि से आए शाहरुख खान का मानना है कि उनके बच्चे उनके पदचिन्हों पर चलते हुए अभिनय कॅरियर को ही अपनाएं, यह जरूरी नहीं है। शाहरुख का हालांकि कहना है कि उनकी बेटी सुहाना अभिनेत्री बनने की इच्छुक है।

शाहरुख ने यहां एक समारोह में कहा, “मैं परंपरा में विश्वास नहीं करता। मेरे पिता अभिनेता नहीं थे और मुझे लगता है कि मेरे बच्चों को भी अभिनय के क्षेत्र में आना जरूरी नहीं है। मैं उन्हें नहीं कहूंगा कि उन्हें क्या करना चाहिए, क्योंकि मेरे माता-पिता ने भी कभी ऐसा नहीं कहा।”

शाहरुख ने कहा, “अगर मेरे बच्चे अभिनेता या अभिनेत्री नहीं बनते तो कोई फर्क नहीं पड़ता।”

शाहरुख के मुताबिक उन्हें नहीं लगता कि उनके बच्चों को उनसे अभिनय के गुण विरासत में मिले हैं।

शाहरुख ने कहा, “मेरा बेटा आर्यन अभी पढ़ रहा है और मैं चाहता हूं कि वह स्नातक की पढ़ाई पूरी करे, लेकिन मेरी बेटी अभिनय सीखना चाहती है। लेकिन मैं नहीं जानता कि इसके लिए उसे किस संस्थान में भेजना चाहिए।”

 

मनोरंजन

हाईकोर्ट पहुंचे जैकी श्रॉफ, बिना इजाजत ‘भ‍िडू’ बोला तो देना होगा 2 करोड़ जुर्माना

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मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज एक्‍टर जैकी श्रॉफ को आपने अक्सर ‘भ‍िडू’ शब्द का प्रयोग करते सुना होगा। कई बार उनसे मुलाकात के दौरान उनके फैंस भी इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब अगर आपने आगे से ऐसा किया तो आपको 2 करोड़ रु का जुर्माना देना पड़ सकता है। एक्‍टर ने ‘व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की सुरक्षा’ के तहत ‘भ‍िडू’ शब्‍द के इस्‍तेमाल पर दिल्‍ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और कई संस्‍थानों के ख‍िलाफ केस किया है।

यह मामला उन संगठनों के खिलाफ दायर किया गया है जो जैकी श्रॉफ का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए कर रहे हैं। उम्मीद है कि कोर्ट इस मामले में जल्द ही अपना फैसला सुनाएगा ताकि अभिनेता के प्रचार अधिकारों की रक्षा की जा सके। मामले को कल 14 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

यह पहली बार नहीं है कि किसी बॉलीवुड अभिनेता ने गोपनीयता और प्रचार अधिकार के लिए अदालत से मदद मांगी है। इससे पहले दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने लोगों को अभिनेता की नकल करने और उनकी सहमति के बिना उनकी आवाज का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

दूसरी ओर पिछले साल अनिल कपूर ने भी अपने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इसके अलावा, इस साल जनवरी में अनिल कपूर ने केस जीत लिया। इसमें उन्होंने ‘झकास’ शब्द वाला तकिया कलाम, अपने नाम, आवाज, बोलने के तरीके, छवि, समानता और हावभाव की सुरक्षा की मांग की थी। उनका कहना था कि इसका प्रयोग न किया जाए।

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